अब महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की सभी प्रतियोगी परीक्षाएं मराठी में भी होंगी: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि अब से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाएं मराठी में भी कराई जाएंगी। यह निर्णय उन मराठीभाषी छात्रों के लिए बड़ी राहत है जो केवल अंग्रेज़ी में आयोजित परीक्षाओं में कठिनाई का अनुभव करते हैं।
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि अब से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाएं मराठी में भी कराई जाएंगी। यह निर्णय उन मराठीभाषी छात्रों के लिए बड़ी राहत है जो केवल अंग्रेज़ी में आयोजित परीक्षाओं में कठिनाई का अनुभव करते हैं।
यह मुद्दा महाराष्ट्र विधान परिषद में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक मिलिंद नार्वेकर ने उठाया था। उन्होंने पूछा कि जब अधिकांश परीक्षाएं द्विभाषिक हैं, तो इंजीनियरिंग और कृषि से जुड़ी कुछ परीक्षाएं मराठी में क्यों नहीं होतीं?
इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि हालांकि अधिकांश MPSC परीक्षाएं पहले से ही अंग्रेज़ी और मराठी दोनों में आयोजित की जाती हैं, लेकिन कुछ तकनीकी परीक्षाएं न्यायालयों के आदेशों के अनुसार केवल अंग्रेज़ी में होती हैं क्योंकि इन विषयों की मराठी में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं।
तकनीकी विषयों की मराठी पाठ्यपुस्तकों पर काम जारी
सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए तकनीकी विषयों की मराठी पाठ्यपुस्तकें तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “चाहे फिलहाल पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध न हों, लेकिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत हमें इंजीनियरिंग कोर्स मराठी में पढ़ाने की अनुमति है। हम MPSC के साथ मिलकर एक सुनियोजित टाइमलाइन बनाएंगे और जल्द ही ये परीक्षाएं भी मराठी में होंगी।”
तकनीकी शिक्षा को क्षेत्रीय भाषाओं में लाने का राष्ट्रीय प्रयास
यह निर्णय विशेष रूप से तकनीकी क्षेत्रों की MPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे मराठी छात्रों के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी तकनीकी शिक्षा को क्षेत्रीय भाषाओं में लाने के प्रयास चल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, आईआईटी मद्रास ने अब तक 207 तकनीकी पाठ्यक्रमों का अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं में किया है, जिनमें लोकप्रिय कोर्स 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स का परिचय' भी शामिल है।
सरकार का उद्देश्य: भाषा अब सरकारी नौकरी की राह में बाधा न बने
इस कदम से महाराष्ट्र सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भाषा अब सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में बाधा न बने और हर छात्र को उसकी मातृभाषा में समान अवसर प्राप्त हो।
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