‘हम वो चीजें बेच रहे हैं जिनकी दुनिया को ज़्यादा ज़रूरत नहीं’ — नीति आयोग सीईओ ने भारत के व्यापार असंतुलन पर जताई चिंता
नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने सोमवार को कहा कि भारत का निर्यात ढांचा (Export Basket) वैश्विक मांग के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि दुनिया के कुल माल आयात (Merchandise Imports) का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा उन उत्पादों में केंद्रित है, जिनमें भारत की..
नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने सोमवार को कहा कि भारत का निर्यात ढांचा (Export Basket) वैश्विक मांग के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बताया कि दुनिया के कुल माल आयात (Merchandise Imports) का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा उन उत्पादों में केंद्रित है, जिनमें भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.2 प्रतिशत है।
इसके विपरीत, जिन उत्पादों का वैश्विक आयात केवल 3 प्रतिशत है, उनमें भारत की निर्यात हिस्सेदारी 18.2 प्रतिशत है। यह खुलासा नीति आयोग की ‘क्वार्टरली ट्रेड वॉच रिपोर्ट (Q4-FY2025)’ में किया गया, जिसका सोमवार को विमोचन हुआ।
सुब्रमण्यम ने कहा, “यह दर्शाता है कि हमारा व्यापार असंतुलित है। यह कुछ उत्पादों तक सीमित है और वो भी गलत उत्पादों तक। हम उन चीजों का व्यापार कर रहे हैं जिनकी दुनिया को बहुत बड़ी मात्रा में आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने कहा,“दुनिया आगे बढ़ चुकी है, हम अभी भी पुराने उत्पादों में अटके हैं”
सुब्रमण्यम के अनुसार, आज की दुनिया का व्यापार उच्च-मूल्य वाले उत्पादों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल्स की ओर बढ़ चुका है, जबकि भारत अभी भी जूट, चाय, कॉफी और कपास जैसी नकदी फसलों पर निर्भर है।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की हिस्सेदारी इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, पेट्रोलियम ऑयल, सोना और दवाओं जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में बेहद सीमित है, जबकि ये चारों मिलकर वैश्विक मांग का लगभग 15.9 ट्रिलियन डॉलर का हिस्सा हैं।
“इन उच्च मांग वाले क्षेत्रों में विविधीकरण (Diversification) भारत के निर्यात को वैश्विक व्यापार प्रवृत्तियों से जोड़ने और उसे दीर्घकालिक रूप से स्थिर बनाने के लिए आवश्यक है,” रिपोर्ट में कहा गया।
भारत और चीन का निर्यात तुलना
2005 से 2024 के बीच भारत की वैश्विक निर्यात हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से बढ़कर 2 प्रतिशत हुई है।
वहीं चीन की हिस्सेदारी इसी अवधि में 7 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई।
व्यापार असंतुलन से निपटने के उपाय
सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत को प्रतिस्पर्धी विनिर्माण (Competitive Manufacturing) पर ध्यान देना चाहिए और साथ ही बाजारों को अधिक खुला (Open Markets) रखना चाहिए ताकि व्यापार का प्रवाह बाधित न हो।
“यदि आप किसी उद्योग या क्षेत्र को बचाने के लिए आयात पर रोक लगाएँगे, तो आप निर्यात भी नहीं कर पाएँगे,” उन्होंने कहा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है, और साथ ही दूसरा सबसे बड़ा आयातक भी है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए पूँजी (Capital), भूमि (Land), श्रम (Labour) और सुविधाओं (Utilities) को सस्ता, सुलभ और अधिक कुशल बनाना होगा।
एशियाई देशों से व्यापार बढ़ाने की ज़रूरत
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की अंतिम तिमाही में भारत के प्रमुख निर्यात बाज़ार थे —
अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, चीन और ब्रिटेन, जिनका भारत के कुल निर्यात में 42 प्रतिशत योगदान रहा।
जबकि आयात के प्रमुख स्रोत रहे, चीन, यूएई, रूस और अमेरिका, जो कुल आयात का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत को अब एशियाई देशों — जैसे जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर आदि — के साथ व्यापार विस्तार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगले 20 वर्षों में व्यापार की सबसे तेज़ वृद्धि एशियाई देशों से ही आएगी। हम अभी भी पुराने बाज़ारों में अटके हैं, जबकि एशिया में नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।”
भारत के कुल व्यापार का विश्लेषण
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व्यापार सूचकांक (FY 2025) |
आंकड़ा |
परिवर्तन |
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कुल व्यापार (Total Trade) |
US$ 1.73 ट्रिलियन |