मथुरा की कथित शाही ईदगाह मस्जिद मामले में केंद्र और एएसआई को पक्षकार बनाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि शाही ईदगाह मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित वह आदेश, जिसमें हिंदू पक्ष की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें अपनी वाद पत्र (प्लांट) में संशोधन करने..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि शाही ईदगाह मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित वह आदेश, जिसमें हिंदू पक्ष की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें अपनी वाद पत्र (प्लांट) में संशोधन करने और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) तथा केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दी गई थी, प्रथम दृष्टया सही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 मार्च को हिंदू पक्ष द्वारा दायर संशोधन आवेदन को स्वीकार कर, उन्हें वाद में नए तथ्य जोड़ने तथा केंद्र सरकार और एएसआई को प्रतिवादी बनाने की अनुमति दी थी।
इस आदेश को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत का रुख किया था और इसे रद्द करने की मांग की थी। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि हिंदू पक्ष द्वारा वाद में संशोधन का प्रयास, उनके (मुस्लिम पक्ष के) बचाव को दरकिनार करने का एक तरीका है, जो "प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट" (Places of Worship Act) पर आधारित था।
सुनवाई के दौरान, प्रधान न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने मुस्लिम पक्ष की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा, "शाही ईदगाह मस्जिद प्रबंधन समिति की यह दलील कि हाईकोर्ट का आदेश गलत है, बिल्कुल निराधार है।"
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का अर्थ है कि हिंदू पक्ष को अपने मुख्य वाद में एएसआई और केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दी गई है।
शीर्ष अदालत ने सोमवार को मुस्लिम पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल तक के लिए टाल दी।
उल्लेखनीय है कि विवादित परिसर मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पास स्थित है, जो हिंदुओं के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व का स्थल है।
हिंदू पक्षकारों का दावा है कि जिस स्थान पर मस्जिद स्थित है, वहां पहले एक मंदिर था और इसके कई संकेत स्थल पर मौजूद हैं।
वहीं, मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा कि हिंदू पक्ष द्वारा दायर मुकदमे 'प्लेसेस ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न्स) एक्ट, 1991' का उल्लंघन करते हैं, और इसलिए वे विचारणीय नहीं हैं।
ध्यान देने योग्य है कि 1 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मयंक जैन ने भी शाही ईदगाह मस्जिद समिति द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें हिंदू पक्ष द्वारा दायर वादों की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी। हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट में दावा किया था कि श्रीकृष्ण का जन्मस्थान मस्जिद के नीचे स्थित है और वहां कई ऐसे संकेत हैं, जो सिद्ध करते हैं कि मस्जिद के स्थान पर पूर्व में एक मंदिर था।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हिंदू पक्ष की याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि हिंदू पक्ष के वाद 'प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट' के तहत प्रतिबंधित हैं, जो 15 अगस्त 1947 की स्थिति में किसी भी पूजा स्थल का स्वरूप बदलने पर रोक लगाता है।
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