जेएनयूएसयू का नेतृत्व करेंगे नितीश कुमार.. एक वामपंथी छात्र नेता जिनके बड़े इरादे हैं..!
दिल्ली। नितीश कुमार, जो हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के अध्यक्ष चुने गए हैं, बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के हमनाम हैं और उन्हीं के राज्य से ताल्लुक भी रखते हैं। हालांकि, नये जेएनयूएसयू अध्यक्ष वामपंथी गठबंधन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फ्रंट (DSF) से..
नयी दिल्ली। नितीश कुमार, जो हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के अध्यक्ष चुने गए हैं, बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के हमनाम हैं और उन्हीं के राज्य से ताल्लुक भी रखते हैं। हालांकि, नये जेएनयूएसयू अध्यक्ष वामपंथी गठबंधन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फ्रंट (DSF) से जुड़े हैं।
मिलिए जेएनयूएसयू के नितीश कुमार से
26 वर्षीय नितीश कुमार जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज में पीएचडी के तीसरे वर्ष के छात्र हैं। एआईएसए-डीएसएफ गठबंधन ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पद जीतने के बाद नितीश कुमार को जेएनयूएसयू अध्यक्ष घोषित किया गया।
राजनीति में नितीश कुमार के आने की कहानी
नितीश कुमार का राजनीतिक सफर भारत के वंचित समुदायों के जीवन अनुभवों से प्रेरित होकर शुरू हुआ था, जो उनकी पीएचडी से पहले ही प्रारंभ हो चुका था।
संयुक्त वाम पैनल द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, "नितीश कुमार भारत के वंचित समुदायों के जीवन अनुभवों को अपने साथ लेकर चलते हैं।"
नितीश कुमार का एजेंडा क्या है?
नितीश कुमार ने आरोप लगाया कि 2015-16 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पैनल में आने के बाद जेएनयू पर 'राष्ट्रविरोधी' छवि का ठप्पा लग गया था। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "इस बार हम एक संघ के रूप में ऐसा नहीं होने देंगे।" उल्लेखनीय है कि एबीवीपी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध एक स्वतंत्र दक्षिणपंथी छात्र संगठन है।
नितीश कुमार कहते हैं कि उनका लक्ष्य जेएनयू में अधिक फंडिंग लाना है। विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे में सुधार के अलावा, वे जेएनयूईई (जेएनयू प्रवेश परीक्षा) को पुनः शुरू कराने की भी कोशिश करेंगे।
उन्होंने कहा, "हम सीपीओ मैनुअल को समाप्त करने के लिए भी संघर्ष करेंगे, जो छात्रों पर असहमति और विरोध प्रदर्शनों के लिए जुर्माना लगाता है और महिला छात्रों को दूसरे वर्ष से ही एकल कक्ष (सिंगल-सीटर रूम) दिलाने के लिए भी प्रयासरत रहेंगे।"
नितीश कुमार का परिवार और शिक्षा
किसान पिता और गृहिणी मां के बेटे नितीश कुमार बिहार के अररिया जिले के शेखपुरा गांव से आते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई फोर्ब्सगंज के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर से की थी, जहां, संयुक्त वाम पैनल के अनुसार, उन्होंने पहली बार "शैक्षणिक संस्थानों में सांप्रदायिक फासीवाद के फैलाव को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा।"
इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर 2020 में जेएनयू में मास्टर डिग्री के लिए प्रवेश लिया।
नितीश कुमार का राजनीतिक सफर
नितीश कुमार के जेएनयू में प्रवेश का समय भारत में सार्वजनिक शिक्षा के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण दौर कोविड-19 महामारी और उसके प्रभाव के साथ जुड़ा रहा। वामपंथी गठबंधन ने आरोप लगाया कि जेएनयू प्रशासन ने "आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा से वंचित करने के लिए" लंबे समय तक परिसर बंद रखा।
2021 में, नितीश कुमार ‘रीओपन जेएनयू’ आंदोलन के एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे, जिसमें उन्होंने विभिन्न विभागों के छात्रों को संगठित कर ऑफलाइन कक्षाएं, हॉस्टल अलॉटमेंट और विश्वविद्यालय की सुविधाओं तक पहुँच की मांग उठाई।
अगस्त 2023 में, उन्होंने जेएनयू में हॉस्टल संकट को लेकर 16 दिन का भूख हड़ताल भी किया, जिसे छात्र आंदोलन के एक निर्णायक क्षण के रूप में देखा गया।
एआईएसए जेएनयू इकाई के सचिव के रूप में नितीश कुमार ने फेलोशिप राशि बढ़ाने, प्रवेश परीक्षा बहाल कराने और राजनीतिक प्रभाव में की गई फैकल्टी नियुक्तियों के खिलाफ भी अभियान चलाया।
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