‘अन्य लोगों को सुविधाजनक ढंग से नजरअंदाज किया गया’: हिमंत सरमा और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें सार्वजनिक अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई थी। इस याचिका में असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के कथित भेदभावपूर्ण बयानों का हवाला दिया..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें सार्वजनिक अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई थी। इस याचिका में असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के कथित भेदभावपूर्ण बयानों का हवाला दिया गया था।
तीन जजों की पीठ, जिसकी अगुवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant कर रहे थे, ने याचिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। अदालत ने याचिकाकर्ताओं, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल Najeeb Jung और प्रोफेसर Roop Rekha Verma की प्रतिष्ठा को स्वीकार करते हुए कहा कि याचिका कुछ खास व्यक्तियों को ही निशाना बनाती दिखती है, जबकि अन्य को नजरअंदाज कर दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, “याचिकाकर्ता प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं, हम उनका सम्मान करते हैं। उनसे कहिए कि किसी खास व्यक्ति को निशाना न बनाएं। केवल चुनिंदा लोगों को ही क्यों? बाकी लोगों को बहुत सुविधाजनक ढंग से नजरअंदाज कर दिया गया है। यह उचित नहीं है।”
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि ‘सार्वजनिक सेवकों’ की तरह ‘सार्वजनिक हस्तियों’ के लिए भी एक अनिवार्य आचार संहिता तैयार की जा सकती है। सीजेआई ने कहा, “हम सभी राजनीतिक दलों को संवैधानिक नैतिकता, मूल्यों और आपसी सम्मान के महत्व को समझाना चाहते हैं। इन सिद्धांतों को हर किसी पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, यही हमारी अपेक्षा है। सार्वजनिक सेवकों के लिए पहले से ही कानून, नियम और दिशा-निर्देश मौजूद हैं। सार्वजनिक हस्तियों के लिए भी कुछ इसी तरह की आचार संहिता हो सकती है।”
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और कहा कि वह इस मुद्दे पर एक अधिक व्यापक याचिका दायर करेंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब Bharatiya Janata Party की असम इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें कथित तौर पर हिमंत बिस्वा सरमा दो लोगों की ओर राइफल ताने हुए दिखाई दे रहे थे..एक ने टोपी पहन रखी थी और दूसरे की दाढ़ी थी। भारी विरोध के बाद यह वीडियो हटा लिया गया।
इससे एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने इसी घटना को लेकर विशेष जांच दल (SIT) से जांच की मांग वाली अलग याचिका खारिज कर दी थी और याचिकाकर्ताओं को Gauhati High Court जाने का निर्देश दिया था। पीठ ने चुनावी समय में हाईकोर्ट को दरकिनार कर सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की “परेशान करने वाली प्रवृत्ति” पर भी चिंता जताई।
पीठ ने कहा, “यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है कि हर मामला अंततः यहां आ जाता है। हम पहले ही उच्च न्यायालयों से पर्यावरण और वाणिज्यिक मुकदमे छीन चुके हैं।”
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