‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी समाप्त’: ईरान कार्रवाई पर ट्रंप प्रशासन का दावा, उद्देश्य हासिल
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार तड़के घोषणा की कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” समाप्त हो गया है और इसके सभी उद्देश्य पूरे कर लिए गए हैं। यह सैन्य अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इज़राइल की साझेदारी से चलाया गया था, जिसने पिछले दो महीनों से पश्चिम एशिया में तनाव..
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार तड़के घोषणा की कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” समाप्त हो गया है और इसके सभी उद्देश्य पूरे कर लिए गए हैं। यह सैन्य अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इज़राइल की साझेदारी से चलाया गया था, जिसने पिछले दो महीनों से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया था।
.@SecRubio: "Operation Epic Fury is concluded. We achieved the objectives of that operation. We're not cheering for an additional situation to occur. We would prefer the path of peace. What @POTUS would prefer is a deal... that is, so far, not the route that Iran has chosen." pic.twitter.com/blkqn3Bqdm — Rapid Response 47 (@RapidResponse47) May 5, 2026
रुबियो ने कहा, “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अब समाप्त हो चुका है। हमने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। हम आगे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, बल्कि शांति का रास्ता बेहतर मानते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप एक समझौता चाहते हैं, लेकिन अब तक ईरान ने वह रास्ता नहीं चुना है।”
क्षेत्रीय अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन
28 फरवरी को शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकना बताया गया। इस दौरान तेहरान में बड़े राजनीतिक बदलाव भी देखने को मिले। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर फोकस
रुबियो ने कहा कि इस अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को बहाल करना था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है।
उन्होंने बताया कि कई देशों ने अमेरिका से अपने जहाजों की सुरक्षा और मार्ग बहाली के लिए मदद मांगी थी। इसके बाद अमेरिकी सेना को निर्देश दिया गया कि वह फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करे।
ईरान को सख्त चेतावनी
रुबियो ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा, “उन्हें अमेरिका की इच्छाशक्ति को परखने की गलती नहीं करनी चाहिए, खासकर ट्रंप के नेतृत्व में। अगर उन्होंने ऐसा किया, तो अंततः उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा।”
ट्रंप का आक्रामक रुख
वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “ईरान के पास अब न नौसेना है, न वायुसेना और न ही कोई प्रभावी रक्षा प्रणाली। उनके नेता भी खत्म हो चुके हैं। हम उन्हें परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।”
निष्कर्ष
“ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” की समाप्ति के साथ अमेरिका ने इसे अपनी रणनीतिक सफलता बताया है, लेकिन पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
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