'हमारे निर्णय केवल राष्ट्रीय हितों से संचालित होते हैं…' – रूस की तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत की प्रतिक्रिया
रूस की शीर्ष तेल कंपनियों रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर अमेरिका द्वारा लगाए गए हालिया प्रतिबंधों के बाद भारत ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि .....
नयी दिल्ली। रूस की शीर्ष तेल कंपनियों रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर अमेरिका द्वारा लगाए गए हालिया प्रतिबंधों के बाद भारत ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उसकी ऊर्जा संबंधी नीतियां और निर्णय उसके 1.4 अरब (140 करोड़) नागरिकों के लिए सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करने की प्राथमिकता से ही संचालित होंगे।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत की ऊर्जा खरीद नीति राष्ट्रीय हितों और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों पर आधारित है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है।
उन्होंने कहा, "तेल खरीद से जुड़े हमारे निर्णय बाजार की गतिशीलता—यानी वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव और परिवर्तनों—से संचालित होते हैं। हमारा ईंधन स्रोत करने का दृष्टिकोण इस जिम्मेदारी से तय होता है कि हमें अपने लोगों को ऊर्जा उपलब्ध करानी है—ऐसे दामों पर जो किफायती हों, ताकि हमारे 1.4 अरब नागरिकों की जरूरतें पूरी की जा सकें।"
जायसवाल यह बयान अमेरिकी प्रतिबंधों के भारत की रूस से तेल आयात पर प्रभाव से जुड़े सवालों के जवाब में दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेता रहेगा, लेकिन उसकी प्राथमिकता ऊर्जा की सुलभता और सुरक्षा पर ही केंद्रित रहेगी।
रूस पर अमेरिका के नये प्रतिबंध
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए थे। इनका उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को को मिलने वाले प्रमुख वित्तीय स्रोतों को बंद करना है। प्रतिबंधों के तहत कंपनियों की अमेरिकी संपत्तियां फ्रीज कर दी गई हैं और अमेरिकी कंपनियों या नागरिकों को इनसे या इनकी सहायक इकाइयों से कारोबार करने की अनुमति नहीं है।
भारत-रूस संबंधों पर असर?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर में भारत यात्रा के मद्देनज़र जब पूछा गया कि क्या इन प्रतिबंधों से भारत-रूस साझेदारी प्रभावित होगी, तो जायसवाल ने कहा,
"भारत-रूस संबंध बेहद महत्वपूर्ण और बहुआयामी हैं। दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, व्यापार सहित कई क्षेत्रों में सहयोग जारी है। हम इन क्षेत्रों में अपनी परस्पर सहमति के आधार पर साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में काम करते रहेंगे।"
कुछ भारतीय कंपनियों ने रोका रूसी तेल आयात
विदेश मंत्रालय ने यह भी पुष्टि की कि कई भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है।
जायसवाल ने कहा, "हमने कई रिपोर्टें देखी हैं, और हमारी भारतीय कंपनियों ने भी हमें अपने दृष्टिकोण के बारे में सूचित किया है, जो आपसे पहले साझा किया जा चुका है।"
उन्होंने आगे कहा, "भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि हमारे निर्णय हमारे नागरिकों की जरूरतों, राष्ट्रीय हितों, और वैश्विक बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही हम तय करते हैं कि अपनी ऊर्जा और ईंधन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किस देश से आयात करना उचित रहेगा।"
भारत-अमेरिका व्यापार संबंध और छूटें
अमेरिका के साथ व्यापारिक मुद्दों पर जायसवाल ने कहा कि दोनों देश लंबित विषयों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं और एक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, "भारत-अमेरिका संबंध व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। दोनों देश इन संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए निरंतर संपर्क में हैं।"
जब पूछा गया कि क्या भारत अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) के जवाब में कोई कदम उठाएगा, तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर निर्णय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना में अपनी भागीदारी के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट मिली है।
उन्होंने कहा, "हाँ, मैं पुष्टि कर सकता हूँ कि हमें छह महीने की छूट प्रदान की गई है। इसके बारे में विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी।"
चीन से दुर्लभ खनिज आयात पर भी प्रतिक्रिया
ब्रीफिंग के दौरान जायसवाल ने यह भी बताया कि कुछ भारतीय कंपनियों को चीन से 'रेयर अर्थ मैग्नेट्स' (दुर्लभ पृथ्वी चुंबक) आयात करने के लिए लाइसेंस जारी किए गए हैं। यह निर्णय हाल ही में दक्षिण कोरिया में हुई अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता के बाद लिया गया है।
उन्होंने हालांकि अमेरिका और चीन के बीच दक्षिण कोरिया में हुए नए व्यापार समझौते पर टिप्पणी करने से इनकार किया।
उन्होंने कहा, "हम यह देख रहे हैं कि अमेरिका-चीन के बीच हुई ढीलों का भारत पर क्या असर पड़ सकता है।"
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