गैस संकट पर पाकिस्तान का बड़ा दांव: स्पॉट एलएनजी खरीद से पीछे हटा, होर्मुज तनाव कम होने की उम्मीद पर भरोसा

इस समय मध्य पूर्व संकट ने पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई देश ईंधन की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेजी से गैस और तेल के सौदे कर रहे हैं, ताकि संभावित वैश्विक संकट से बचा जा सके। लेकिन, Pakistan ने इस मामले में जोखिम भरा रास्ता चुना है। पाकिस्तान ने तत्काल एलएनजी..

गैस संकट पर पाकिस्तान का बड़ा दांव: स्पॉट एलएनजी खरीद से पीछे हटा, होर्मुज तनाव कम होने की उम्मीद पर भरोसा
09-05-2026 - 12:25 PM

इस समय मध्य पूर्व संकट ने पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई देश ईंधन की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेजी से गैस और तेल के सौदे कर रहे हैं, ताकि संभावित वैश्विक संकट से बचा जा सके। लेकिन, Pakistan ने इस मामले में जोखिम भरा रास्ता चुना है। पाकिस्तान ने तत्काल एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) खरीदने से इनकार करते हुए यह दांव लगाया है कि Strait of Hormuz में तनाव जल्द कम हो जाएगा और Qatar से सस्ती एलएनजी आपूर्ति समय पर पहुंच जाएगी।

आपातकालीन एलएनजी टेंडर रद्द

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी कंपनी Pakistan LNG Ltd ने मई में डिलीवरी के लिए आवश्यक दो एलएनजी कार्गो की आपातकालीन निविदा जारी नहीं की। यह टेंडर गुरुवार को बंद हुआ था।

ट्रेडर्स के मुताबिक पाकिस्तान का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव धीरे-धीरे कम हो रहा है और कतर से अनुबंधित दो एलएनजी खेप जल्द पाकिस्तान पहुंच जाएंगी।

एलएनजी आयात में भारी गिरावट

शिपिंग डेटा के अनुसार मार्च की शुरुआत से अब तक पाकिस्तान को केवल एक एलएनजी खेप प्राप्त हुई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में बड़ी गिरावट है, जब पाकिस्तान हर महीने औसतन नौ एलएनजी कार्गो आयात करता था।

पाकिस्तान और कतर के बीच दीर्घकालिक समझौते के तहत मिलने वाली एलएनजी की कीमत स्पॉट मार्केट से खरीदी जाने वाली गैस की तुलना में लगभग आधी पड़ती है। इसी वजह से पाकिस्तान महंगे स्पॉट बाजार से दूरी बनाए रखना चाहता है।

ऊर्जा संकट और बिजली कटौती का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि स्पॉट मार्केट से खरीद से बचना पाकिस्तान की ऊर्जा समस्याओं को और बढ़ा सकता है। देश पहले ही गंभीर गैस कमी का सामना कर रहा है, जिसके कारण कई हिस्सों में बिजली कटौती बढ़ गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम?

ऊर्जा संकट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी अस्थिरता है। फरवरी के अंत से यहां संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।

यह जलमार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति के साथ-साथ भारी मात्रा में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन का प्रमुख रास्ता है। अप्रैल की शुरुआत से युद्धविराम लागू होने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच ताजा तनाव ने फिर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

दो साल बाद स्पॉट बाजार में लौटना पड़ा

ब्लूमबर्ग के अनुसार, पिछले महीने पाकिस्तान को दो वर्षों से अधिक समय बाद फिर से स्पॉट मार्केट का रुख करना पड़ा था क्योंकि क्षेत्रीय संघर्ष के चलते अनुबंधित आपूर्ति बाधित हो गई थी।

नवीनतम टेंडर में 12-14 मई और 24-26 मई के बीच एलएनजी डिलीवरी मांगी गई थी। हालांकि तनाव के बावजूद कुछ जहाज अभी भी होर्मुज मार्ग से गुजर रहे हैं, जिनमें पिछले सप्ताह एक डीजल टैंकर भी शामिल था।

कतर से संपर्क में पाकिस्तान

ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने 7 मई को कतर के प्रधानमंत्री Mohammed bin Abdulrahman Al Thani से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय संघर्ष पर चर्चा की और शांति प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

महंगाई और अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव

इस बीच पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि वैश्विक तेल कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो पाकिस्तान में महंगाई लंबे समय तक दोहरे अंकों में बनी रह सकती है।

Topline Securities Ltd की “पाकिस्तान स्ट्रैटेजी” रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थिति “लंबी और लगातार बदलती” बनी हुई है और सुधार केवल संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर निर्भर करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार अगले एक वर्ष में पाकिस्तान में महंगाई दर 9 से 10 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जबकि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में यह 11 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो महंगाई लगातार ऊंची बनी रहेगी। हर 10 डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि से महंगाई में लगभग 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा तो पाकिस्तान में वार्षिक महंगाई लगभग 11 प्रतिशत तक जा सकती है, जिससे State Bank of Pakistan को ब्याज दरें और बढ़ानी पड़ सकती हैं।

मध्य पूर्व संकट का वैश्विक असर

मध्य पूर्व में संकट शुरू होने के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाजार लगातार दबाव में हैं। लगभग दो महीने पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई और तेल-गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ गई।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।