पाकिस्तान पर बढ़ते कर्ज के बीच पीओके की संपत्तियां बेचने का खुलासा
'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत द्वारा पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों और 11 एयरबेस को नष्ट किए जाने के बावजूद, पाकिस्तान कश्मीर को लेकर अपनी उग्र बयानबाज़ी से पीछे नहीं हट रहा। पाकिस्तान के स्वयंभू फील्ड मार्शल असीम मुनीर, जिन्होंने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में मारे गए आतंकियों को "शहीद" कहकर महिमामंडित..
नयी दिल्ली। 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत द्वारा पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों और 11 एयरबेस को नष्ट किए जाने के बावजूद, पाकिस्तान कश्मीर को लेकर अपनी उग्र बयानबाज़ी से पीछे नहीं हट रहा। पाकिस्तान के स्वयंभू फील्ड मार्शल असीम मुनीर, जिन्होंने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में मारे गए आतंकियों को "शहीद" कहकर महिमामंडित किया, अब भी कश्मीर के मुद्दे पर अड़े हुए हैं जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) की स्थिति बेकाबू होती जा रही है।
एबीपी न्यूज़ के पास मौजूद विशेष जानकारी के अनुसार, भारी कर्ज से जूझ रही पाकिस्तानी सरकार चुपचाप पीओके से जुड़ी संपत्तियों को बेच रही है। ये संपत्तियां कभी जम्मू-कश्मीर की रियासत का हिस्सा थीं और आज पाकिस्तान के लाहौर, रावलपिंडी, सियालकोट और खैबर पख्तूनख्वा जैसे हिस्सों में स्थित हैं।
कर्ज चुकाने के लिए संपत्तियों की बिक्री?
लाहौर की लैंड एडमिनिस्ट्रेशन से प्राप्त रिकॉर्ड बताते हैं कि पाकिस्तान ने 1961 से अब तक कम से कम 35 पीओके संपत्तियां बेच दी हैं। इनमें कुछ प्रमुख संपत्तियां शामिल हैं:
- लाहौर: हवेली दयाल सिंह, कश्मीर हाउस, लुंडा बाज़ार, पूंछ हाउस
- रावलपिंडी: राजा बाज़ार, सराय खुर्द, एक और पूंछ हाउस
- सियालकोट और कहुटा: सराय महाराज
- झेलम: फॉरेस्ट गेस्ट हाउस
- शेखूपुरा ज़िला: दो पूरे गांव
पाकिस्तान का दावा है कि इन बिक्री से मिली रकम का उपयोग वह अपने बढ़ते कर्ज — जो इस समय ₹63 लाख करोड़ (अमेरिकी $224 अरब) तक पहुँच चुका है — को चुकाने में कर रहा है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस पैसे का इस्तेमाल भारत के जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी किया जा रहा है — विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठनों के ज़रिए।
पीओके सरकार को कोई जानकारी नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन संपत्तियों की बिक्री के बारे में पीओके की सरकार को न तो कोई जानकारी दी गई और न ही उनसे कोई सलाह-मशविरा किया गया। विशेषज्ञों का आरोप है कि कई संपत्तियां बेहद कम कीमत पर उन लोगों को बेची गईं, जिनका संबंध पाकिस्तान की सत्ता से है। इससे इन सौदों पर और ज्यादा संदेह पैदा हो गया है।
इस साल पाकिस्तान का कुल बजट ₹15.73 लाख करोड़ है, जिसमें से लगभग आधा हिस्सा सिर्फ कर्ज़ की किश्तें चुकाने में जा रहा है। ऐसे में ऐतिहासिक विरासत वाली इमारतों और शहरी भूमि को गुपचुप तरीके से बेचना, पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और भारत के खिलाफ छद्म युद्ध (proxy war) की उसकी रणनीति को उजागर करता है।
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