भारत 2028 तक बनेगा विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक हो सकेगा: शक्तिकांत दास
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि भारत वर्ष 2028 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने कहा कि यह विकास संरचनात्मक सुधारों, राजकोषीय अनुशासन और मजबूत व्यापक आर्थिक आधारों के कारण संभव..
पुणे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि भारत वर्ष 2028 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने कहा कि यह विकास संरचनात्मक सुधारों, राजकोषीय अनुशासन और मजबूत व्यापक आर्थिक आधारों के कारण संभव होगा।
शनिवार को पुणे स्थित गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकनॉमिक्स (GIPE) के 31वें दीक्षांत समारोह में “परिवर्तनशील वैश्विक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था” विषय पर व्याख्यान देते हुए दास ने कहा कि पिछले दशक में भारत की नीतिगत मजबूती और आर्थिक सुधारों ने उसे वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन बना दिया है।
कार्यक्रम में उन्हें सार्वजनिक सेवा और आर्थिक नीति में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉक्टर ऑनोरिस कॉज़ा (मानद डॉक्टरेट) की उपाधि भी प्रदान की गई।
दास ने कहा, “भारत की आर्थिक शक्ति बनने की यात्रा उसकी आंतरिक क्षमता और सतत सुधारों का परिणाम है। ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य मजबूत नीतिगत ढांचे और बहु-क्षेत्रीय विकास पर आधारित है।”
उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना’ जैसे अभियानों से भारत का उद्योगिक आधार (manufacturing base) तेजी से मजबूत हुआ है। साथ ही, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, बायोटेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे नए क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक उद्योग जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और फार्मास्युटिकल्स भी निरंतर वृद्धि की दिशा में हैं।
दास ने कहा कि सेवा क्षेत्र (Services Sector), जो भारत की करीब 30% कार्यबल को रोजगार देता है, विकास और निर्यात का मुख्य इंजन बना हुआ है। उन्होंने भारत के STEM स्नातकों और ज्ञान-आधारित क्षमता को डिजिटल नवाचार और तकनीकी नेतृत्व का आधार बताया।
इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री गतिशक्ति’, ‘भारतमाला’, ‘सागरमाला’ और ‘उड़ान’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पिछले दशक में भारत की राष्ट्रीय राजमार्ग लंबाई में 60% की वृद्धि, बंदरगाह क्षमता दोगुनी और आंतरिक माल परिवहन सात गुना बढ़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि 2016 में लागू लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्य प्रणाली (Flexible Inflation Targeting – FIT) ने मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं को स्थिर किया, मौद्रिक विश्वसनीयता को बढ़ाया और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की।
दास ने भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र की मजबूती की भी सराहना की, जो दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) और रेरा (RERA) जैसे सुधारों से सुदृढ़ हुआ है।
उन्होंने निष्कर्ष में कहा, “यदि भारत सुधार, नवाचार और वित्तीय अनुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ता रहा, तो वह 2047 तक ‘विकसित भारत’ का अपना सपना अवश्य साकार करेगा।”
दीक्षांत समारोह का समापन काले हॉल में डिग्री और पुरस्कार वितरण के साथ हुआ, जिसकी अध्यक्षता जीआईपीई कुलाधिपति संजीव सन्याल और कुलपति प्रो. उमाकांत दास ने की।
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