आरबीआई ने रद्द किया इस बैंक का लाइसेंस! क्या अब ग्राहक अपना पैसा नहीं निकाल पाएंगे?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महाराष्ट्र के सातारा जिले में स्थित जीजामाता महिला सहकारी बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरबीआई ने यह कदम बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति और पूंजी की कमी के कारण उठाया..
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महाराष्ट्र के सातारा जिले में स्थित जीजामाता महिला सहकारी बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरबीआई ने यह कदम बैंक की कमजोर वित्तीय स्थिति और पूंजी की कमी के कारण उठाया है। इसके बाद अब यह बैंक किसी भी तरह का बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकेगा।
आरबीआई ने क्यों रद्द किया बैंक का लाइसेंस?
आरबीआई ने मंगलवार को आदेश जारी करते हुए कहा कि जीजामाता महिला सहकारी बैंक की पूंजी और आय की संभावनाएं अपर्याप्त हैं और बैंक की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
बैंक 7 अक्टूबर 2025 से किसी भी तरह का बैंकिंग व्यवसाय नहीं कर सकेगा, यानी अब वह जमा राशि स्वीकार या लौटाने का अधिकार नहीं रखेगा।
पहले भी रद्द हो चुका है लाइसेंस
यह पहली बार नहीं है जब इस बैंक पर आरबीआई ने कार्रवाई की हो। आरबीआई ने 30 जून 2016 को भी इसका लाइसेंस रद्द किया था। बाद में बैंक ने इस फैसले के खिलाफ अपील की, जिसके बाद 23 अक्टूबर 2019 को अपीलीय प्राधिकरण ने बैंक का लाइसेंस बहाल कर दिया था। हालांकि, उस समय प्राधिकरण ने यह भी निर्देश दिया था कि बैंक के वित्तीय वर्ष 2013-14 का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए ताकि उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
बैंक ने ऑडिट में सहयोग नहीं किया
आरबीआई ने बताया कि उसने ऑडिट के लिए एक फोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया था लेकिन बैंक ने आवश्यक सहयोग नहीं दिया।
इस वजह से ऑडिट अधूरा रह गया और बैंक की असली वित्तीय स्थिति का पता नहीं चल सका।
आरबीआई द्वारा की गई नियमित जांच में यह पाया गया कि बैंक की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
बैंक अब जमाकर्ताओं को भुगतान करने में असमर्थ
आरबीआई ने अपने आदेश में कहा है कि बैंक के पास न तो पर्याप्त पूंजी है और न ही आय की संभावना। आरबीआई ने कहा, “वर्तमान वित्तीय स्थिति में बैंक अपने सभी जमाकर्ताओं को उनका पूरा पैसा लौटाने में सक्षम नहीं है।” केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि बैंक को आगे चलने देने से जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
बैंक बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का आदेश
लाइसेंस रद्द होने के बाद आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारी संस्थाओं के रजिस्ट्रार से अनुरोध किया है कि बैंक को बंद करने का आदेश जारी करें और एक परिसमापक (liquidator) नियुक्त करें।
अब बैंक की संपत्तियां बेचकर ही जमाकर्ताओं और ऋणधारकों के दावे निपटाए जाएंगे।
जमाकर्ताओं को मिलेगा ₹5 लाख तक का बीमा लाभ
आरबीआई ने बताया कि बैंक बंद होने के बाद प्रत्येक जमाकर्ता को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत ₹5 लाख तक की बीमा राशि मिलेगी।
30 सितंबर 2024 तक बैंक की 94.41% जमा राशि DICGC बीमा के तहत कवर थी। इसका अर्थ है कि अधिकांश छोटे जमाकर्ताओं की राशि सुरक्षित है।
जमाकर्ताओं को क्या करना होगा?
बैंक बंद होने के बाद DICGC जमाकर्ताओं को उनकी खाते में शेष राशि (अधिकतम ₹5 लाख तक) लौटाएगा। इसके लिए जमाकर्ताओं को अपनी KYC दस्तावेज़ और खाते की जानकारी परिसमापक को जमा करनी होगी।
कमजोर बैंकों पर आरबीआई की सख्ती जारी
पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई ने कई सहकारी बैंकों पर इसी तरह की कार्रवाई की है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि केंद्रीय बैंक अब किसी भी ऐसे बैंक को संचालित नहीं होने देगा जिसकी वित्तीय स्थिति कमजोर हो या जो जमाकर्ताओं के हितों को खतरे में डालता हो।
आरबीआई का यह कदम देश के बैंकिंग तंत्र को मजबूत, पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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1. जीजामाता महिला सहकारी बैंक का लाइसेंस कब रद्द किया गया? |
आरबीआई ने बैंक का लाइसेंस 7 अक्टूबर 2025 से प्रभावी रूप से रद्द किया है। |
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2. लाइसेंस रद्द होने का कारण क्या है? |
बैंक की पूंजी अपर्याप्त थी, आय की संभावनाएं नहीं थीं और वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। |
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3. अब जमाकर्ताओं का क्या होगा? |
प्रत्येक जमाकर्ता को ₹5 लाख तक की राशि DICGC बीमा योजना के तहत मिलेगी। |
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4. क्या पहले भी लाइसेंस रद्द हुआ था? |
हां, 2016 में लाइसेंस रद्द हुआ था, लेकिन 2019 में अपील के बाद बहाल कर दिया गया था। |
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5. परिसमापन की प्रक्रिया कौन देखेगा? |
महाराष्ट्र के सहकारी संस्थाओं के रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त परिसमापक इस प्रक्रिया का संचालन करेंगे। |
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