कसता जा रहा है अनिल अंबानी की रिलायंस पावर पर शिकंजा, ED ने फर्जी बैंक गारंटी मामले में दाखिल की चार्जशीट
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड और इससे जुड़े अन्य संस्थानों के खिलाफ फर्जी बैंक गारंटी जमा कराकर सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) से बड़ा ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट हासिल करने की कोशिश के मामले में चार्जशीट दाखिल कर,,
नयी दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड और इससे जुड़े अन्य संस्थानों के खिलाफ फर्जी बैंक गारंटी जमा कराकर सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) से बड़ा ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट हासिल करने की कोशिश के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। SECI, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत संचालित एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है।
फर्जी गारंटियों से टेंडर में बोली लगाने का आरोप
ED की जांच उन FIRs पर आधारित है, जो दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दर्ज की थीं..
- एक FIR SECI द्वारा रिलायंस NU BESS लिमिटेड (रिलायंस पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी) के खिलाफ दर्ज की गई,
- जबकि दूसरी FIR रिलायंस NU BESS ने ओडिशा स्थित बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड और उसके MD पार्थ सारथी बिस्वाल के खिलाफ दर्ज कराई थी।
जांच में सामने आया कि रिलायंस NU BESS ने SECI के 1000 MW/2000 MWh स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट के टेंडर के लिए 68.2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी की आवश्यकता थी।
नियमों के अनुसार विदेशी बैंक की गारंटी को भारत में उसकी शाखा या SBI की ओर से एंडोर्स किया जाना जरूरी था।
लेकिन ED के अनुसार रिलायंस पावर ने “दुर्भावनापूर्ण इरादे” से बिस्वाल ट्रेडलिंक को फर्जी बैंक गारंटी की व्यवस्था करने के लिए नियुक्त किया।
ये गारंटियां—
- मनीला स्थित FirstRand Bank की अस्तित्वहीन शाखा,
- और मलेशिया की ACE Investment Bank Limited
के नाम से जारी की गईं।
SBI का फर्जी ईमेल आईडी और तैयार किए गए नकली पत्रों के जरिए इन गारंटियों को एंडोर्स्ड दिखाया गया। जांच में पता चला कि धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए s-bi.co.in नाम से SBI जैसा दिखने वाला नकली डोमेन भी बनाया गया।
फर्जी वर्क ऑर्डर के जरिए धनराशि ट्रांसफर
जांच में यह भी सामने आया कि रिलायंस पावर ने अपनी एक अन्य कंपनी रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड से 6.33 करोड़ रुपये बिस्वाल ट्रेडलिंक को भेजे।
इसके लिए ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज के फर्जी वर्क ऑर्डर बनाए गए, जो कभी हुई ही नहीं थीं।
इसके अलावा रिलायंस पावर ने इस व्यवस्था को वैध दिखाने के लिए 5.40 करोड़ रुपये “फीस” के तौर पर भी दिए।
ED का दावा: रिलायंस को फर्जी गारंटी की जानकारी थी
ED ने कहा कि रिलायंस ग्रुप के प्रमुख अधिकारी जानते थे कि SBI के स्पूफ ईमेल से भेजी गई बैंक गारंटी फर्जी थी।
जब SECI ने इस पर संदेह जताया और सवाल उठाए, तो रिलायंस ने 24 घंटे के भीतर IDBI बैंक से वास्तविक गारंटी की व्यवस्था की, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के कारण SECI ने इसे स्वीकार नहीं किया।
ल-2 बिडर के रूप में चयनित होने के बाद भी बोली बचाने की कोशिश में रिलायंस ने—
- कोलकाता की SBI शाखा से फर्जी विदेशी गारंटी के नए एंडोर्समेंट की कोशिश की,
- एक नकली एग्रीमेंट तैयार किया,
- और कोलकाता नगर निगम से फर्जी पते पर एनलिस्टमेंट सर्टिफिकेट भी हासिल किया।
जब यह भी विफल रहा तो रिलायंस ने बिस्वाल ट्रेडलिंक और उसके MD पर आरोप लगाकर शिकायत दर्ज कराई, जिसे ED ने “दोष दूसरे पर मढ़ने की कोशिश” बताया।
CFO की गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्क
ED ने कहा कि जांच में रिलायंस ग्रुप की “सांठगांठ और दुर्भावनापूर्ण इरादे” साबित होते हैं।
- रिलायंस पावर के CFO अशोक कुमार पाल और अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
- चार्जशीट दाखिल करने से पहले ED ने 5.15 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (proceeds of crime) कुर्क कर दी।
मामला अब विशेष PMLA अदालत में है, जहां आगे की सुनवाई में संबंधित कंपनियों और अधिकारियों की आपराधिक जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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