RSS प्रमुख मोहन भागवत का राष्ट्र सुरक्षा पर बयान: "भारत को इतना शक्तिशाली बनाएं कि कई ताक़तें मिलकर भी उसे झुका न सकें"

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को सैन्य और आर्थिक रूप से इतना शक्तिशाली बनाने का आह्वान किया है कि दुनिया की कई शक्तियां भी एक साथ मिलकर उसे जीत न सकें..

RSS प्रमुख मोहन भागवत का राष्ट्र सुरक्षा पर बयान: "भारत को इतना शक्तिशाली बनाएं कि कई ताक़तें मिलकर भी उसे झुका न सकें"
26-05-2025 - 06:18 AM

नयी दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को सैन्य और आर्थिक रूप से इतना शक्तिशाली बनाने का आह्वान किया है कि दुनिया की कई शक्तियां भी एक साथ मिलकर उसे जीत न सकें। उन्होंने कहा कि सीमा पर मौजूद "दुष्ट शक्तियों की कुटिलता" के बीच भारत के पास अब "शक्ति" प्राप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

यह बातचीत संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (21-23 मार्च 2025) के संदर्भ में RSS-संबद्ध साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गनाइज़र’ को दी गई  और ऑपरेशन सिंदूर से पहले रिकॉर्ड की गई थी।

मुख्य बातें:

 भारत को आत्मनिर्भर और अपराजेय बनाना जरूरी

"हम हर दिन प्रार्थना में कहते हैं — 'अजय्यं च विश्वस्य देहि मे शक्तिम्'यानी ऐसी शक्ति दो कि हम दुनिया में अजेय हों।"

भागवत ने कहा, सच्ची शक्ति आंतरिक होती है। हमें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। जब तक हमारे पास बल नहीं होगा, तब तक हमारी नैतिकता भी सुरक्षित नहीं है।”

सीमा पर "दुष्ट शक्तियों की कुटिलता":

उन्होंने कहा कि भारत चारों ओर से आक्रामक प्रवृत्ति वाली शक्तियों से घिरा है, हमने सीमाओं पर इन शक्तियों की कुटिलता देखी है। इसलिए शक्ति प्राप्त करना हमारी मजबूरी है।”

शक्ति के साथ धर्म और सद्गुण जरूरी

  • RSS प्रमुख ने चेतावनी दी कि "केवल बल प्रयोग" बिना दिशा के हिंसा का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा, शक्ति का उपयोग धर्म और सदाचार के साथ हो। हमें धर्म की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए शक्ति चाहिए।”

हिंदू समाज की वैश्विक स्थिति पर विचार

 हिंदुओं की रक्षा तभी संभव, जब वे शक्तिशाली हों:

  • भागवत ने कहा, जब तक हिंदू समाज ताक़तवर नहीं बनेगा, तब तक वैश्विक स्तर पर कोई उसके मानवाधिकारों की चिंता नहीं करेगा।”
  • उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ अभूतपूर्व प्रतिक्रिया का ज़िक्र करते हुए कहा. अब स्थानीय हिंदू भी कहने लगे हैं — हम भागेंगे नहीं, अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे।”

 "जहां भी हिंदू हैं, संघ उनके साथ"

  • RSS प्रमुख ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय नियमों के भीतर रहते हुए, दुनियाभर में हिंदुओं के लिए जो भी संभव होगा, वह करेंगे।”

 संघ का दीर्घकालिक लक्ष्य:

 100 साल का संकल्प — हिंदू समाज को एकजुट करना

  • उन्होंने कहा, अगली तिमाही सदी में हमारा लक्ष्य है, सम्पूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना और भारत को परम वैभव तक ले जाना।”

"धार्मिक नहीं, धर्मिक क्रांति की आवश्यकता":

  • भागवत बोले, अब दुनिया को कृषि, औद्योगिक और वैज्ञानिक क्रांतियों के बाद एक धार्मिक (धार्मिक नहीं, धर्मिक) क्रांति की ज़रूरत है — जो सत्य, पवित्रता, करुणा और तपस्या पर आधारित हो।”
  • इसके लिए उन्होंने भारत (अर्थात हिंदू समाज) को विश्व को मार्ग दिखाने वाला बताया।

RSS का मूल विचार: हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है

  • उन्होंने कहा कि संघ की मूल आत्मा यही है कि हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है। बाकी सब समयानुसार बदल सकता है, लेकिन यह सत्य ‘नित्य’ है।”
  • संघ कार्यकर्ता की शपथ में भी यही भाव होता है यानी हिंदू धर्म, संस्कृति और समाज की रक्षा करते हुए हिंदू राष्ट्र का सर्वांगीण विकास।”

 "विचारों की स्वतंत्रता, लेकिन निर्णय सामूहिक"

भागवत ने कहा कि संघ में सभी को अपनी बात रखने की आज़ादी है, लेकिन एक बार सामूहिक निर्णय हो जाने के बाद सब मिलकर उस पर चलते हैं। उन्होंने कहा, नित्य को सुरक्षित रखते हुए, अनित्य को समय के अनुसार बदला जाता है।”

निष्कर्ष

RSS प्रमुख का यह बयान स्पष्ट करता है कि संघ अब केवल वैचारिक संगठन नहीं रह गया है, बल्कि उसका फोकस राष्ट्र सुरक्षा, वैश्विक हिंदू पहचान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर है। उन्होंने भारत को न सिर्फ़ शक्तिशाली बल्कि धार्मिक और नैतिक मार्गदर्शक राष्ट्र बनाने की बात कही है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।