‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का उभार विपक्ष के लिए सबक: शशि थरूर ने कही बड़ी बात
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रही व्यंग्यात्मक ऑनलाइन पहल ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ को लेकर कहा है कि यह देश के युवाओं में बढ़ती नाराजगी और असंतोष का संकेत..
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रही व्यंग्यात्मक ऑनलाइन पहल ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ को लेकर कहा है कि यह देश के युवाओं में बढ़ती नाराजगी और असंतोष का संकेत है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस उभार को एक “सबक” की तरह देखना चाहिए और युवाओं से बेहतर तरीके से जुड़ने का प्रयास करना चाहिए।
एक इंटरव्यू में थरूर ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई और नीट पेपर लीक विवाद जैसे मुद्दों से परेशान युवा अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए नए माध्यम तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को इस असंतोष को समझकर युवाओं के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्यंग्यात्मक ऑनलाइन समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने इंस्टाग्राम पर 1.5 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं, जिससे वह फॉलोअर संख्या के मामले में भाजपा और कांग्रेस दोनों से आगे निकल गया है।
लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत
सीजेपी की लोकप्रियता पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने कहा कि यह आंदोलन देश की मौजूदा परिस्थितियों को लेकर जनता की निराशा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक बड़ा खुलासा है, क्योंकि इससे पता चलता है कि लोगों में कितनी हद तक निराशा और असंतोष है, जिसे वे इस तरह की पहल के जरिए व्यक्त कर पा रहे हैं।”
थरूर ने इसे लोकतंत्र के लिए “स्वस्थ” बताते हुए कहा, “यह स्पष्ट रूप से एक स्वतःस्फूर्त पहल थी, लेकिन बहुत तेजी से वायरल हो गई। लोकतंत्र में यह अच्छी बात है कि लोगों के पास अपनी भावनाएं और इच्छाएं व्यक्त करने के अलग-अलग तरीके हों। व्यंग्यात्मक, हास्यपूर्ण और साथ ही गंभीर संदेश देने वाला ऐसा मंच युवाओं की निराशा को व्यक्त करने का बेहतरीन माध्यम है।”
नीट विवाद बना निर्णायक मोड़
थरूर ने कहा कि नीट पेपर लीक विवाद उन युवाओं के लिए “ऊंट की कमर तोड़ने वाला आखिरी तिनका” साबित हुआ, जो पहले से ही बेरोजगारी, महंगाई और भविष्य को लेकर अनिश्चितता से जूझ रहे थे।
उन्होंने कहा, “नीट परीक्षा विवाद निश्चित रूप से वह आखिरी झटका था, लेकिन इसके साथ ही बेरोजगारी, जीवन में सीमित अवसर, शिक्षा व्यवस्था और बढ़ती महंगाई जैसी समस्याओं को लेकर भी व्यापक असंतोष था।”
विवाद से प्रभावित छात्रों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “उन छात्रों के लिए यह समझना कि उन्हें फिर से पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, बेहद दर्दनाक रहा होगा।”
थरूर ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि चार युवाओं ने आत्महत्या कर ली, जबकि कई अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह बेहद गंभीर मामला है।”
‘विपक्ष को इस असंतोष को दिशा देनी चाहिए’
जब उनसे पूछा गया कि क्या विपक्ष युवाओं से जुड़ने में विफल रहा है, तो थरूर ने कहा कि लोगों की नाराजगी केवल विपक्ष नहीं, बल्कि सरकार और पूरे राजनीतिक तंत्र के खिलाफ भी है।
उन्होंने कहा, “मुझे यह दिलचस्प लगता है कि मीडिया लगातार विपक्ष को दोष देता है। असंतोष अक्सर उन परिस्थितियों को लेकर होता है, जिनकी जिम्मेदारी आखिरकार सरकार पर होती है।”
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि विपक्ष के सामने चुनौती है कि वह इस असंतोष को मुख्यधारा की राजनीति में बदल सके।
उन्होंने कहा, “विपक्ष की चुनौती यह होगी कि इस असंतोष को मुख्यधारा की राजनीति की दिशा में मोड़ा जाए।”
थरूर ने कहा कि राजनीतिक दलों को युवाओं के साथ ज्यादा संवाद करना चाहिए और उन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए जिन्हें यह व्यंग्यात्मक समूह उठा रहा है।
युवा विकल्प तलाश रहे हैं
हालिया विधानसभा चुनावों, खासकर तमिलनाडु का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा कि युवा मतदाता अब नए विकल्पों की तलाश में दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, “विजय की जीत को ‘जेन-ज़ी की जीत’ कहा जाना काफी हद तक सही है। उनके अधिकांश समर्थक 30 वर्ष से कम उम्र के थे। इससे साफ संकेत मिलता है कि नई पीढ़ी बेचैन है, निराशा महसूस कर रही है और नए विकल्प तलाश रही है।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह नाराजगी केवल सत्ताधारी दल तक सीमित नहीं हो सकती।
थरूर ने कहा, “विपक्ष को भी आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि लोगों की निराशा केवल सरकार से नहीं बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र से हो सकती है।”
‘एक बड़ा अवसर मौजूद है’
शशि थरूर ने कहा कि सीजेपी का उभार यह भी दिखाता है कि पारंपरिक राजनीति से हटकर किए गए संदेश युवा दर्शकों से कितनी तेजी से जुड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा, “अभिजीत दिपके ने जो किया है, उससे हम सबके लिए यह संदेश गया है कि यहां एक बड़ा अवसर मौजूद है, जिसे समझकर इस्तेमाल किया जा सकता है।”
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