राइट टू हेल्थ: मुख्यमंत्री गहलोत ने डाॅक्टरों की हड़ताल का ठीकरा संघ पर फोड़ा..! बोले, डॉक्टरों में आरएसएस की लॉबी, चार-पांच गद्दार लोग गुमराह कर रहे 

<p><em><strong>प्रदेश में राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की हड़ताल शनिवार को 14वें दिन भी जारी रही। इस बीच, सीएम अशोक गहलोत ने हड़ताल को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा।&nbsp;</strong></em></p>

राइट टू हेल्थ: मुख्यमंत्री गहलोत ने डाॅक्टरों की हड़ताल का ठीकरा संघ पर फोड़ा..! बोले, डॉक्टरों में आरएसएस की लॉबी, चार-पांच गद्दार लोग गुमराह कर रहे 
02-04-2023 - 09:36 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

गहलोत ने जयपुर व कोटा में कांग्रेस के संभाग सम्मेलनों में हिस्सा लेने के साथ मीडिया से बातचीत में कहा- डॉक्टरों में एक आरएसएस की लॉबी है, जो डॉक्टरों को बर्बाद कर रही है। चार-पांच लोग हैं जो गद्दार हैं। वे ही बिल पर आपत्ति जता रहे हैं। सीएम ने कहा- डॉक्टरों को अहम छोड़ना चाहिए। कुछ लोगों ने गलतफहमी पैदा की है। चीफ सेक्रेटरी, फाइनेंस सेक्रेटरी से डॉक्टरों की खुलकर बात हुई। सभी सुझाव माने हैं। उसके बाद भी डॉक्टरों में चार-पांच गद्दार लोग थे, जिन्होंने एतराज जताया। वे आरएसएस से जुड़े थे। 
गहलोत ने कहा कि गद्दार के चक्कर में डॉक्टर एक हो जाते हैं। अब नेतागीरी कर रहे हैं। लोग तकलीफ पा रहे हैं। अभी तो बिल पास हुआ है। नोटिफिकेशन जारी होगा तब कानून लागू होगा। नियम बनने बाकी हैं। बीकानेर में धरने पर बैठे डॉक्टरों के पास डूंगर कॉलेज के कुछ छात्र फूल लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ‘नो टू आरटीएच’ का नारा लगाने लगे। इस पर छात्र ‘आरटीएच हमारा हक’ का नारा लगाने लगे। इस पर पुलिस, आरएसी तैनात की गई।
कोटा में 15 मिनट डॉक्टरों से संवाद, जयपुर भी बुलाया
कोटा में कांग्रेस के संभाग सम्मेलन में हिस्सा लेकर जयपुर लौटते समय एयरपोर्ट पर सीएम गहलोत ने आंदोलनरत डाॅक्टरों से करीब 15 मिनट संवाद भी किया। प्रतिनिधि मंडल में शामिल डाॅ. राहुलदेव अरोड़ा ने बताया- सीएम ने वार्ता के लिए डॉक्टरों के प्रतिनिधि मंडल को जयपुर भी बुलाया है।
सरकार ने जारी किए जवाब
डॉक्टरों की आपत्तियों को लेकर विभाग ने उनके जवाब जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि कुछ डॉक्टर पुराना प्रारूप प्रचारित कर भ्रम बना रहे हैं। जवाबों को सवालों के साथ बताया गया है।
1. क्या आपात स्थिति में सभी अस्पतालों में उपचार करना जरूरी होगा?
जो अस्पताल जैसे उपचार की योग्यता व सुविधा रखेंगे, वैसे ही मरीजों को उपचार, फर्स्ट एड देना होगा।
2. आई हॉस्पिटल में हार्ट अटैक के मरीज को कैसे इलाज मिलेगा?
अस्पताल के स्तर के अनुसार ही सेवाएं देनी होंगी। यानी आंखों का अस्पताल है तो आंखों का ही उपचार होगा।
3. क्या सभी निजी अस्पतालों को आपात स्थिति में फ्री में इलाज देना होगा?
चिह्नित निजी अस्पतालों में ही पूर्व भुगतान के बिना आपात उपचार दिया जाएगा। मरीज भुगतान नहीं देगा तो सरकार पुनर्भरण करेगी। चिह्नित अस्पताल की परिभाषा हितधारकों की राय के बाद नियमों में शामिल होगी। पुनर्भरण की प्रक्रिया आॅटो अप्रूवल होगी।
4. सिंगल विंडो शिकायत निवारण तंत्र विकसित हो, वरना डाॅक्टरों पर केस होंगे?
यह तंत्र डॉक्टरों की भागीदारी से नियमों में शामिल किया जा सकेगा।
5. निजी अस्पतालों में ब्यूरोक्रेट्स का व राजनीतिक दखल बढ़ेगा?
जिला कमेटी में कलेक्टर, जिला परिषद सीईओ, आयुर्वेद अधिकारी, मेडिकल काॅलेज प्राचार्य, आईएमए के दो डाॅक्टर, स्वास्थ्य अधिकारी आदि ही होंगे। राज्य कमेटी में कुलपति, डाॅक्टर होंगे।
6. आपात मरीज को परिभाषित नहीं किया?
संशोधित बिल में यह आपत्ति दूर कर दी है। दुर्घटना, सर्पदंश, जानवर के काटने व स्टेट हेल्थ अथॉरिटी द्वारा परिभाषित स्थितियां शामिल की हैं। हादसे की आपात स्थिति, डेजिग्नेटेड हेल्थ केयर सेंटर, इमरजेंसी प्रसूति केयर, प्राथमिक उपचार, स्टेबलाइजेशन आदि शामिल।
7. आपात इलाज का पुनर्भरण कैसे होगा?
मरीज भुगतान न करे तो सरकार पुनर्भरण करेगी। नागरिकों के कर्तव्य, कार्मिकों के अधिकारों को भी शामिल कर लिया है।
8. अथाॅरिटी के फैसले के खिलाफ केस का ही अधिकार नहीं दिया?
संशोधित बिल में सिविल कोर्ट में सुनवाई का प्रावधान कर दिया है।
 

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।