प्रवासी समुदाय के लिए झटका: जन्मसिद्ध नागरिकता पर ट्रंप के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि निचली अदालतों ने अपनी सीमा से बाहर जाकर ट्रंप प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को सीमित करने वाली नीति पर देशव्यापी रोक लगाई..
वॉशिंगटन। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि निचली अदालतों ने अपनी सीमा से बाहर जाकर ट्रंप प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को सीमित करने वाली नीति पर देशव्यापी रोक लगाई थी। यह फैसला नीति की संवैधानिकता पर अंतिम निर्णय नहीं है, लेकिन यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक प्रक्रियात्मक जीत मानी जा रही है और भविष्य में विवादास्पद नीतियों को अदालत से तुरंत रोकने को कठिन बना सकता है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालतें सिर्फ उन्हीं पक्षों तक राहत सीमित रखें, जो केस का हिस्सा हों – पूरे देश में blanket रोक लगाना उनकी अधिकार सीमा से बाहर है। बहुमत की राय में लिखा गया, "राहत केवल उन पक्षों तक सीमित होनी चाहिए जो वास्तव में मामले में शामिल हैं।" अदालत ने वॉशिंगटन, मैसाचुसेट्स और मैरीलैंड की जिला अदालतों की आलोचना की, जिन्होंने पूरी अमेरिका में ट्रंप नीति को रोक दिया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला उस कार्यकारी आदेश से जुड़ा है जिसे ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के पहले दिन ही पारित किया था। आदेश के अनुसार, अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चों को तब तक नागरिक नहीं माना जाएगा जब तक कि उनके माता-पिता में से कम से कम एक अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (Green Card holder) न हो। यह आदेश 14वें संविधान संशोधन की पारंपरिक व्याख्या को सीधी चुनौती देता है, जिसमें कहा गया है कि "जो भी अमेरिका में जन्मा है और उसके अधिकार क्षेत्र में आता है, वह नागरिक है।"
फैसले पर प्रतिक्रियाएं
यह आदेश आते ही 22 राज्यों के अटॉर्नी जनरल, प्रवासी अधिकार समूहों और प्रवासी दंपतियों ने अदालतों में चुनौती दी थी। उन्होंने 1898 के सुप्रीम कोर्ट केस "यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क" का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि गैर-नागरिक माता-पिता से पैदा हुए बच्चों को भी अमेरिकी नागरिकता का अधिकार है।
हालांकि ट्रंप प्रशासन ने संविधानिक मुद्दे से सीधे न टकराकर इस बात को अदालत में चुनौती दी कि क्या कोई एक जिला न्यायाधीश पूरे देश में नीति पर रोक लगा सकता है? न्याय विभाग ने कहा कि कोर्ट के आदेश केवल उस केस के वादी-प्रतिवादी तक सीमित होने चाहिए।
ट्रंप ने मार्च में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था, "अगर चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट ने इस ज़हरीली और अभूतपूर्व स्थिति को तुरंत नहीं सुधारा, तो हमारे देश की स्थिति बहुत गंभीर हो जाएगी।"
इस फैसले का असर
यह फैसला नीतियों की संवैधानिकता तय नहीं करता लेकिन न्यायिक आदेशों की सीमा को स्पष्ट करता है। इससे राष्ट्रपति को बिना तुरंत देशव्यापी अदालती रोक के नीतियां लागू करने की छूट मिल सकती है। यह executive powers पर कानूनी नियंत्रण के तौर-तरीकों को भविष्य में बदल सकता है।
महत्वपूर्ण बात: सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि ट्रंप की जन्मसिद्ध नागरिकता नीति संविधान के अनुरूप है या नहीं। 14वें संशोधन की व्याख्या से जुड़ा मूल मुद्दा अब भी निचली अदालतों में लंबित है और आने वाले महीनों में इस पर सुनवाई की जाएगी।
फिलहाल, यह ट्रंप प्रशासन के लिए एक रणनीतिक जीत है और यह आने वाले समय में न्यायिक प्रक्रिया में बड़ा प्रभाव डाल सकती है। यह फैसला इस बहस की दिशा भी तय करेगा कि क्या राष्ट्रपति को देशव्यापी नीति लागू करने के लिए अदालत से खुली छूट होनी चाहिए, या उन नीतियों को तुरंत व्यापक न्यायिक रोक का सामना करना चाहिए।
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