वक्फ बिल पर समर्थन को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का बहिष्कार किया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उनके सरकारी आवास पर रविवार को आयोजित इफ्तार पार्टी का कई प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने बहिष्कार किया। इसमें इमारत-ए-शरिया, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, और खानकाह मजीबिया जैसे संगठनों ने भाग नहीं लिया।

वक्फ बिल पर समर्थन को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का बहिष्कार किया
24-03-2025 - 01:38 PM

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उनके सरकारी आवास पर रविवार को आयोजित इफ्तार पार्टी का कई प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने बहिष्कार किया। इसमें इमारत-ए-शरिया, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, और खानकाह मजीबिया जैसे संगठनों ने भाग नहीं लिया। इस बहिष्कार की वजह बनी जनता दल (यूनाइटेड) का वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के प्रति समर्थन।

इमारत-ए-शरिया ने दी सफाई – 'नाराज़ नहीं, बस विरोध है'

इमारत-ए-शरिया के नाज़िम सय्यदुर रहमान क़ासमी ने समाचार एजेंसी PTI से बातचीत में कहा, इमारत-ए-शरिया ने इफ्तार पार्टी का बहिष्कार किया क्योंकि नीतीश कुमार वक्फ विधेयक का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हमें उनसे व्यक्तिगत रूप से कोई नाराज़गी नहीं है। हमारा विरोध 26 मार्च को प्रस्तावित है, और हमें उम्मीद है कि उसके बाद नीतीश कुमार अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगे।”

बीजेपी ने आरजेडी पर साधा निशाना – 'बहिष्कार को राजनीतिक रंग देने की कोशिश'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बहिष्कार को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर तीखा हमला किया। पार्टी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा, धार्मिक मुस्लिम संगठनों द्वारा इफ्तार पार्टी का बहिष्कार अत्यंत निंदनीय है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि आरजेडी इस बहिष्कार को राजनीतिक रूप से भुना रही है।”

वक्फ संपत्तियों की रक्षा की मांग, पर बिल पर असहमति

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इमारत-ए-शरिया ने कहा कि वक्फ संपत्तियों, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में है, को अवैध कब्जों से बचाना जरूरी है। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संशोधन विधेयक 2024 मौजूदा व्यवस्था को कमजोर कर रहा है।

इन संगठनों ने यह भी कहा कि बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिरों व मठों की ज़मीनों का मापन शुरू कर दिया है और मुस्लिम समुदाय को बेवजह चिंता नहीं करनी चाहिए। फिर भी वक्फ बोर्ड से संबंधित प्रावधानों पर सावधानीपूर्वक विचार जरूरी है।

आरजेडी ने जारी किया बहिष्कार पत्र, बीजेपी का पलटवार

आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने इमारत-ए-शरिया द्वारा भेजा गया औपचारिक बहिष्कार पत्र सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद बीजेपी ने आरजेडी पर और अधिक हमला बोला, यह आरोप लगाते हुए कि वह मुस्लिम संगठनों के आक्रोश का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।

 पृष्ठभूमि: वक्फ संशोधन विधेयक 2024 क्या है?

यह विधेयक वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन करता है और राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों, संपत्तियों का सर्वेक्षण, तथा अवैध कब्जों को हटाने के तरीकों में बदलाव लाता है।
सरकार का दावा है कि यह विधेयक प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाएगा, जबकि
विपक्ष व मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि इससे धार्मिक अधिकारों का हनन हो सकता है और वक्फ संपत्तियों का सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।