मैंने इमरान खान की वजह से ही पूरे किए 10,000 टेस्ट रन: सुनील गावस्कर

भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ी सुनील गावस्कर ने खुलासा किया कि पूर्व पाकिस्तानी कप्तान इमरान खान ने उनकी क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि, 10,000 टेस्ट रन पूरे करने में अहम भूमिका निभाई थी।

मैंने इमरान खान की वजह से ही पूरे किए 10,000 टेस्ट रन: सुनील गावस्कर
28-02-2025 - 07:01 AM

मुंबई। भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ी सुनील गावस्कर ने खुलासा किया कि पूर्व पाकिस्तानी कप्तान इमरान खान ने उनकी क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि, 10,000 टेस्ट रन पूरे करने में अहम भूमिका निभाई थी।

गावस्कर ने यह किस्सा पहली बार बताया कि अगर इमरान खान के कहने पर उन्होंने संन्यास का फैसला टालने का मन नहीं बनाया होता, तो वह इस ऐतिहासिक मुकाम तक नहीं पहुंच पाते।

कैसे बदला इमरान खान ने गावस्कर का फैसला?

1987 में सरदार पटेल स्टेडियम, अहमदाबाद में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान गावस्कर 10,000 टेस्ट रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। यह उनके करियर का अंतिम टेस्ट सीरीज थी। लेकिन एक साल पहले ही उन्होंने संन्यास लेने की योजना बना ली थी।

गावस्कर ने बताया कि 1986 में इंग्लैंड दौरे के दौरान लंदन में इमरान खान के साथ एक लंच मीटिंग के दौरान उन्होंने अपने संन्यास का मन बना लिया था। लेकिन इमरान खान के कहने पर उन्होंने यह फैसला बदल दिया।

गावस्कर ने एक टीवी शो में अजय जडेजा, वसीम अकरम, वकार यूनुस और निखिल चोपड़ा के साथ बातचीत में कहा, "जब मैंने 10,000 रन बनाए तो वह अहसास अविश्वसनीय था। जब मैंने करियर शुरू किया था, तो 1000 रन बनाकर भी मैं खुश होता। मुझसे कई लोग आगे निकलेंगे, लेकिन जैसे टेनजिंग और एडमंड हिलेरी को माउंट एवरेस्ट पर पहली बार चढ़ने के लिए याद किया जाता है, वैसे ही मुझे 10,000 रन पूरे करने वाला पहला बल्लेबाज बनने के लिए याद किया जाएगा।"

लंदन की लंच मीटिंग का राज

गावस्कर ने आगे बताया, "इमरान खान और मैं लंदन में हैरॉल्ड्स के सामने एक इटैलियन रेस्टोरेंट में लंच करने गए थे। मैंने उनसे कहा कि यह मेरा आखिरी दौरा है और मैं इसके बाद संन्यास लेने वाला हूं। लेकिन इमरान ने कहा, 'नहीं, नहीं... तुम ऐसा नहीं कर सकते। पाकिस्तान की टीम अगले साल भारत दौरे पर जा रही है और मैं चाहता हूं कि तुम उस टीम के खिलाफ खेलो।' मैंने कहा – 'नहीं, पाकिस्तान भारत नहीं आ रहा है।' तब इमरान ने कहा – 'आईसीसी की बैठक होने वाली है और तुम अगले हफ्ते इसका ऐलान सुनोगे।'"

गावस्कर ने आगे कहा कि अगर वह उस समय संन्यास ले लेते तो उनका करियर 9200-9300 रन पर खत्म हो जाता। लेकिन इमरान खान की बात मानकर उन्होंने खेल जारी रखा और दो घरेलू सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10,000 रन का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया।

आखिरी पारी में शानदार प्रदर्शन

गावस्कर ने 1987 की टेस्ट सीरीज के चौथे टेस्ट में 10,000 रन पूरे किए थे। बेंगलुरु टेस्ट उनके करियर की आखिरी पारी थी, जहां उन्होंने चौथी पारी में मुश्किल पिच पर शानदार 96 रनों की पारी खेली। हालांकि, भारत यह मैच 16 रनों से हार गया और पाकिस्तान ने यह सीरीज 1-0 से जीत ली।

क्रिकेट इतिहास में अमर रिकॉर्ड

गावस्कर ने अपने टेस्ट करियर में कुल 10,122 रन बनाए, जिसमें 125 टेस्ट मैचों में 34 शतक और औसत 51.1 रनों का रहा। साल 1987 विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत की हार के बाद गावस्कर ने सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया।

सुनील गावस्कर का यह खुलासा क्रिकेट के दो दिग्गज खिलाड़ियों के बीच गहरी दोस्ती और खेल भावना का उदाहरण है। जिस तरह टेनजिंग नॉर्गे और एडमंड हिलेरी को माउंट एवरेस्ट पर पहली चढ़ाई के लिए याद किया जाता है, उसी तरह क्रिकेट इतिहास में 10,000 टेस्ट रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।