अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के टैरिफ प्रस्ताव पर लगाई रोक, "भारत-पाक संघर्ष" तर्क को किया खारिज
अमेरिका की एक व्यापार अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 'लिबरेशन डे' आयात शुल्क (टैरिफ) को अवैध करार देते हुए इसे प्रभावी होने से रोक दिया है..
वॉशिंगटन। अमेरिका की एक व्यापार अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 'लिबरेशन डे' आयात शुल्क (टैरिफ) को अवैध करार देते हुए इसे प्रभावी होने से रोक दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रंप ने इन टैरिफों को लागू करने में अपने अधिकारों से अधिक कदम उठाया है।
ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार मांगा था, जो केवल राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में असाधारण खतरे से निपटने के लिए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क
ट्रंप सरकार ने अदालत से अपील की थी कि वह टैरिफ लगाने के राष्ट्रपति के अधिकार को बरकरार रखे। प्रशासन ने दावा किया कि इस निर्णय से अमेरिका और चीन के बीच असमान व्यापार संधि के साथ-साथ भारत-पाकिस्तान संघर्ष भी फिर से उभर सकता है।
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान-आधारित आतंकियों के हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा था। ट्रंप ने टैरिफ की धमकी देकर दोनों परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध रोकने में भूमिका निभाई थी, और यह प्रक्रिया अब भी संवेदनशील स्थिति में है, जिसकी अंतिम समयसीमा 7 जुलाई रखी गई है।
अदालत का फैसला:
मैनहटन स्थित अमेरिका की तीन-न्यायाधीशों वाली कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने ट्रंप के सभी तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा:
"IEEPA के तहत कांग्रेस ने राष्ट्रपति को असीमित अधिकार नहीं दिए हैं।"
"यह कानून केवल तभी लागू होता है जब कोई असाधारण और असामान्य खतरा हो, और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है।"
कोर्ट ने कहा कि
- “संविधान के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है।”
- “यह निर्णय ट्रंप की टैरिफ नीति की समझदारी या प्रभावशीलता पर नहीं बल्कि कानून की सीमा पर आधारित है।”
- “अगर IEEPA की व्याख्या कर राष्ट्रपति को असीमित अधिकार दे दिए जाएं, तो यह संवैधानिक शक्ति के वितरण का उल्लंघन होगा।”
ट्रंप टैरिफ नीति:
ट्रंप ने 2 अप्रैल को अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर 10% से लेकर अधिकतम दरों तक के टैरिफ की घोषणा की थी, जिनमें चीन और यूरोपीय संघ प्रमुख थे। हालांकि, अमेरिकी वित्तीय बाजारों में इस नीति से अस्थिरता आने के बाद कई टैरिफ अस्थायी रूप से रोक दिए गए।
12 मई को प्रशासन ने कहा कि चीन पर सबसे अधिक टैरिफ अस्थायी रूप से घटाए जा रहे हैं, ताकि लंबी अवधि के व्यापार समझौते पर बातचीत की जा सके।
ट्रंप के खिलाफ मुकदमे
यह फैसला दो मुकदमों में आया
- Liberty Justice Centre द्वारा दाखिल याचिका – जिसमें पांच छोटे अमेरिकी आयातकों ने टैरिफ को चुनौती दी।
- 13 अमेरिकी राज्यों द्वारा संयुक्त याचिका।
इसके अलावा, कम से कम पांच और याचिकाएं अन्य अदालतों में लंबित हैं।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
व्हाइट हाउस और याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, ट्रंप के नीतिगत सलाहकार और व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टीफन मिलर ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी, "न्यायिक तख्तापलट नियंत्रण से बाहर है।"
यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रंप फिर से चुनावी दौड़ में हैं और "अमेरिका फर्स्ट" व्यापार नीति को केंद्र में रखकर अभियान चला रहे हैं। अदालत के इस निर्णय को राष्ट्रपति की शक्तियों पर सीमांकन की एक अहम कानूनी नजीर माना जा रहा है।
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