उत्तराखंड: धाराली में बाढ़ के बाद अब भी 43 लोग लापता, सरकार की पहली आधिकारिक रिपोर्ट
पांच अगस्त को धाराली में आई अचानक बाढ़ के लगभग एक हफ्ते बाद, अधिकारियों ने सोमवार को पहली बार आधिकारिक तौर पर बताया कि अब भी 43 लोग लापता हैं। साथ ही चेतावनी दी कि 15 अगस्त तक उत्तरकाशी और आसपास के ज़िलों में “भारी से अति भारी” वर्षा का पूर्वानुमान है, जो नए भूस्खलन और बाढ़ का कारण..
देहरादून। पांच अगस्त को धाराली में आई अचानक बाढ़ के लगभग एक हफ्ते बाद, अधिकारियों ने सोमवार को पहली बार आधिकारिक तौर पर बताया कि अब भी 43 लोग लापता हैं। साथ ही चेतावनी दी कि 15 अगस्त तक उत्तरकाशी और आसपास के ज़िलों में “भारी से अति भारी” वर्षा का पूर्वानुमान है, जो नए भूस्खलन और बाढ़ का कारण बन सकती है और खोज व राहत कार्यों में और देरी कर सकती है।
गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को निकालना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और भूवैज्ञानिकों की एक टीम मिलकर आपदा प्रभावित इलाके में काम कर रही है, जहां अस्थिर ढलान और टूटी सड़कें छोटी दूरी की यात्रा को भी बेहद मुश्किल बना रही हैं।
पांडे ने बताया, “लापता लोगों में 9 सेना के जवान, धाराली के 8 स्थानीय निवासी, नज़दीकी गांवों के 5 लोग और बाकी लोग टिहरी, बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल से हैं।” लापता 29 नेपाली मजदूरों में से 5 से संपर्क फिर से स्थापित हुआ है, लेकिन बाकी अब भी लापता हैं। अब तक केवल दो शव बरामद हुए हैं।
धाराली में करीब 300 लोग अब भी रह रहे हैं और राहत वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच जीवन बिता रहे हैं, जबकि जिनके पास अन्य स्थानों पर घर हैं, वे उत्तरकाशी या देहरादून चले गए हैं। अब तक 1,278 लोगों को निकाला जा चुका है, जिनमें सभी फंसे हुए पर्यटक और वे स्थानीय लोग शामिल हैं जिनके पास खुद से जाने का साधन नहीं था। सोमवार सुबह दृश्यता कम होने और उत्तरकाशी के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने के कारण हेलिकॉप्टर अभियान रोकना पड़ा।
इस बीच, मौसम की मार से सड़क मरम्मत का काम धीमी गति से जारी है। लिमछागाड़ में एक बैली पुल तैयार कर लिया गया है, जिससे एक महत्वपूर्ण मार्ग बहाल हो गया है। डबरानी से सोनागाड़ के बीच क्षतिग्रस्त हिस्से पर भारी मशीनरी लगाई गई है। हालांकि, एक मरम्मत कार्य के दौरान सड़क बनाने के लिए चट्टान तोड़ते समय एक पोकलैंड मशीन उफनती भागीरथी नदी में फिसलकर गिर गई। बताया जा रहा है कि चालक तेज बहाव में बह गया और वह अब भी लापता है।
खतरे ज़मीन के भीतर भी छिपे हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि खीर गाड़ से निकलने वाली एक धारा अब भी मलबे के 50 फीट गहरे ढेर के नीचे बह रही हो सकती है। आशंका है कि यह पानी ज़मीन को दलदल में बदल रहा है, जिससे खुदाई बेहद खतरनाक हो सकती है। SDRF के महानिरीक्षक और नोडल अधिकारी अरुण मोहन जोशी ने कहा, “धारा का मुंह मलबे से बंद है, लेकिन पानी नीचे से बह रहा हो सकता है, जिससे मिट्टी अस्थिर हो रही है।”
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