नील कत्याल कौन हैं, ट्रंप के टैरिफ केस से लड़ने वाले भारतीय-अमेरिकी ‘लीगल ईगल’?

भारत से आए प्रवासी माता-पिता के बेटे नील कत्याल अमेरिकी कानूनी जगत की एक बड़ी पहचान हैं। हाल ही में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ (शुल्क) के खिलाफ दायर मुकदमे में अग्रणी भूमिका निभाई है। यह उनके शानदार करियर की अनेक सफलताओं में से एक और अहम मुकाम है। दुनिया भर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या वह ट्रंप की अपील के खिलाफ..

नील कत्याल कौन हैं, ट्रंप के टैरिफ केस से लड़ने वाले भारतीय-अमेरिकी ‘लीगल ईगल’?
31-08-2025 - 11:20 AM

वॉशिंगटन। भारत से आए प्रवासी माता-पिता के बेटे नील कत्याल अमेरिकी कानूनी जगत की एक बड़ी पहचान हैं। हाल ही में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ (शुल्क) के खिलाफ दायर मुकदमे में अग्रणी भूमिका निभाई है। यह उनके शानदार करियर की अनेक सफलताओं में से एक और अहम मुकाम है। दुनिया भर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या वह ट्रंप की अपील के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी जीत दर्ज करेंगे।

नील कत्याल (55) ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अब तक दर्जनों बार बहस की है। उनकी कुछ ऐतिहासिक जीतों में 2023 का “मूर बनाम हार्पर” मामला भी शामिल है, जिसमें उन्होंने “इंडिपेंडेंट स्टेट लेजिस्लेचर थ्योरी” (राज्य विधानसभाओं को संघीय चुनावों पर असीमित अधिकार देने का सिद्धांत) के खिलाफ सफलतापूर्वक तर्क रखा। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में इस सिद्धांत को खारिज कर दिया। कई विशेषज्ञों ने इसे अमेरिकी लोकतंत्र के लिए “अब तक का सबसे अहम केस” कहा है।

कत्याल ने ओबामा प्रशासन में कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के तौर पर काम किया और वहां रहते हुए उन्होंने अफोर्डेबल केयर एक्ट (हेल्थकेयर कानून) की संवैधानिकता के पक्ष में सफलतापूर्वक पैरवी की। वे जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में स्पेशल प्रॉसिक्यूटर भी रहे। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने 2000-2001 के बुश बनाम गोर मामले में तत्कालीन उपराष्ट्रपति अल गोर के लिए सह-वकील के तौर पर पैरवी की थी।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा

नील कत्याल का जन्म शिकागो में हुआ। उनकी मां प्रतिभा डॉक्टर थीं और पिता सुरेंद्र इंजीनियर। उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और फिर येल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री हासिल की। येल में वे प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी संवैधानिक विशेषज्ञ अखिल अमर के शिष्य रहे।

अखिल अमर के भाई विक्रम अमर भी नामी कानूनी विद्वान हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस कॉलेज ऑफ लॉ के डीन रह चुके हैं। वहीं नील कत्याल की बहन सोनिया कत्याल भी वकील हैं और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले लॉ स्कूल में प्रोफेसर हैं।

अमेरिकी न्याय व्यवस्था में भारतीयों का बढ़ता प्रभाव

नील कत्याल समेत कई भारतीय मूल के न्यायविद अमेरिकी न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं..

  • श्री श्रीनिवासनः अमेरिकी अपीली अदालत (डी.सी. सर्किट) के मुख्य न्यायाधीश, और किसी संघीय सर्किट कोर्ट का नेतृत्व करने वाले पहले दक्षिण एशियाई मूल के न्यायाधीश। उन्हें राष्ट्रपति ओबामा ने नियुक्त किया था और सुप्रीम कोर्ट के लिए संभावित उम्मीदवारों में शामिल किया गया था।
  • अमुल थापरः अमेरिकी अपीली अदालत (सिक्स्थ सर्किट) के पहले दक्षिण एशियाई मूल के न्यायाधीश, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप ने नियुक्त किया। इन्हें भी सुप्रीम कोर्ट के संभावित नामों में गिना जाता है।
  • नोएमी रावः डी.सी. सर्किट की अपीली अदालत की न्यायाधीश, जिन्हें ट्रंप ने ब्रेट कैवेनॉ की जगह नियुक्त किया।
  • अमित मेहताः वॉशिंगटन डी.सी. की जिला अदालत के न्यायाधीश, जिन्हें बराक ओबामा ने नियुक्त किया था। इन्होंने 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर हुए हमले से जुड़े मामलों की सुनवाई की।

इस तरह नील कत्याल और उनके परिवार की उपस्थिति न केवल अमेरिकी कानून जगत में भारतीयों की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि आने वाले समय में उनकी भूमिका और भी प्रभावशाली मानी जा रही है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।