“टांगें तोड़ दूंगा”: सीएए को लेकर एसआईआर पर भड़के बंगाल के मंत्री फिरहाद हकीम, बीजेपी और चुनाव आयोग को दी चेतावनी

पश्चिम बंगाल के मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने मंगलवार को बीजेपी और चुनाव आयोग को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोनों मिलकर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करने की कोशिश करते हैं, तो वह “उनकी टांगें तोड़ देंगे..

“टांगें तोड़ दूंगा”: सीएए को लेकर एसआईआर पर भड़के बंगाल के मंत्री फिरहाद हकीम, बीजेपी और चुनाव आयोग को दी चेतावनी
30-10-2025 - 10:47 AM

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने मंगलवार को बीजेपी और चुनाव आयोग को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोनों मिलकर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करने की कोशिश करते हैं, तो वह “उनकी टांगें तोड़ देंगे।”

हकीम राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस बैठक का उद्देश्य राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों को जानकारी देना था।

हकीम ने कहा, “अगर बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर सीएए लागू करने की कोशिश करते हैं, तो मैं उनकी टांग तोड़ दूंगा। मैंने साफ कर दिया है कि अगर एक भी असली मतदाता का नाम सूची से हटाया गया, तो तृणमूल कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करेगी। हम बंगाल के एक भी सच्चे नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने नहीं देंगे।”

उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया “सच्चे मतदाताओं को बाहर करने की साजिश” है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही इस प्रक्रिया को “बैकडोर एनआरसी” (गुप्त रूप से एनआरसी लागू करने की कोशिश) बता चुकी हैं।

दरअसल, एसआईआर की यह प्रक्रिया इस साल की शुरुआत में बिहार में लागू की गई थी, जहां अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले करीब 66 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि गरीबों और अल्पसंख्यकों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि केवल उन लोगों के नाम हटाए गए हैं जो स्थानांतरित हो चुके हैं, जिनके पास दोहरे वोटर आईडी हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है।

बैठक के दौरान, मतदाता पहचान प्रक्रिया और नए फॉर्मों को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। इस बीच, 57 वर्षीय प्रदीप कर की आत्महत्या ने विवाद को और बढ़ा दिया है। उत्तर 24 परगना जिले के पनिहाटी निवासी कर ने कथित तौर पर एसआईआर प्रक्रिया के कारण आत्महत्या की थी। तृणमूल और बीजेपी दोनों ने इस घटना को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए।

बीजेपी पर भय का माहौल बनाने का आरोप लगाते हुए हकीम ने कहा, “जब तक ममता बनर्जी हैं, तब तक बीजेपी की हिम्मत नहीं है कि बंगाल में एनआरसी लागू कर सके।”

वहीं, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा, “किसी भी सच्चे मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। यह सूची पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।