आम आदमी पार्टी को दिल्ली प्रशासन ने दिया 163 करोड़ की वसूली का नोटिस, मनीष सिसोदिया ने कहा बीजेपी के कहने पर दिया गया है नोटिस
<p><em>दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को दिल्ली प्रशासन के सूचना विभाग द्वारा नोटिस दिया गया है कि अगले 10 दिनों में सरकारी खजाने में 163.6 करोड़ रुपये जमा कराये जाएं। दिल्ली के इन्फॉर्मेशन एंड पब्लिसिटी डायरेक्‍टरेट ने इस नोटिस में कहा है कि वर्ष 2016-17 में AAP ने सरकारी विज्ञापनों की आड़ में सरकारी खजाने से राजनीतिक विज्ञापन दिये। यदि गये नोटिस में चेतावनी भी है कि निर्धारित समय में बतायी गई रकम जमा नहीं कराई गयी तो 'जरूरी कार्रवाई' की जाएगी।</em></p>
आम आदमी पार्टी को भेजे गए रिकवरी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट की जिन गाइडलाइंस को आधार बनाया गया है, वे 2015 में तय की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस के अनुसार, सरकारी विज्ञापनों में 'किसी पार्टी के हितों को प्रमोट नहीं किया जाना चाहिए।' सरकारी विज्ञापनों में सत्तारूढ़ पार्टी का नाम लिखे जाने पर भी रोक है।
उधर, आम आदमी पार्टी ने इस नोटिस को लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को निशाने पर लिया है। दिल्ली सरकार में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसेदिया का कहमा है कि इन नोटिस के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जिम्मेवार है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी ने अफसरों को मजबूर किया कि वे मुख्यमंत्री को ऐसा नोटिस भेजें। उन्होंने कहा, 'दिल्ली सरकार में जो अफसर काम करते हैं, उन पर बीजेपी ने केंद्र सरकार के जरिए असंवैधानिक नियंत्रण कर रखा है।' सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी अफसरों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने प्रचंड बहुमत से अरविंद केजरीवाल को चुना है। हमें मैनडेट दिया कि दिल्ली के अफसरों से जनता का काम कराइए लेकिन बीजेपी असंवैधानिक रूप से इन अफसरों पर अपना कब्जा जमाकर बैठी है। सिसोदिया ने कहा कि चुनी हुई सरकार के मंत्रियों को टारगेट किया जा रहा है।
सिसोदिया का कहना है कि ये पुराना मसला है। वर्ष 2016-17 में दिल्ली से बाहर ऐड दिए गए। अब ये कहा जा रहा है कि केजरीवाल को दिल्ली से बाहर ऐड नहीं देने चाहिए थे। सिसोदिया ने चुनौती देते हुए कहा, 'आप पिछले एक महीने के अखबार उठाकर देख लीजिए, बीजेपी के अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों के विज्ञापनों से दिल्ली के अखबार भरे पड़े हैं। मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश हर जगह के... कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के भी आपको दिल्ली के अखबारों के खूब विज्ञापन मिलेंगे। अगर गलत है तो वहां के मुख्यमंत्रियों से बीजेपी पैसा वसूलेगी?
ये हैं सरकारी विज्ञापनों के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश
- 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक रिट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए सरकारी विज्ञापनों के कंटेंट को लेकर दिशानिर्देश यानी कंटेंट गाइडलाइंस निर्धारित कीं।
- सभी राज्यों से अपने-अपने यहां तीन सदस्यीय पैनल गठित करने को कहा गया जो कंटेंट की निगरानी करेगा।
- सरकारी विज्ञापनों का कंटेंट सत्ताधारी पार्टी के हितो को प्रमोट करने वाला न हो। राजनीतिक हस्तियों का महिमामंडन न किया जाए।
- सरकारी विज्ञापनों में सत्ताधारी पार्टी का नाम, सिंबल, लोगो या फ्लैग नहीं होना चाहिए। उनमें विपक्ष की राय और कार्यों पर सीधा हमला न हो।
- सरकारी विज्ञापनों में राजनीतिक दलों या नेताओं की वेबसाइट्स का लिंक न हो।
- सरकारी विज्ञापनों में नेताओं की तस्वीरें अवॉइड की जाएं। अगर जरूरी हो तो केवल राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री या गवर्नर/मुख्यमंत्री की फोटो इस्तेमाल की जाए।
- सरकारी विज्ञापनों का इस्तेमाल मीडिया समूहों को संरक्षण देने में न हो। उनके बदले किसी पार्टी या सत्ता में बैठे व्यक्ति के पक्ष में रिपोर्टिंग न हो।
- सरकारी विज्ञापनों की लागत को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने कई नियम तय किए। मसलन, किन हस्तियों की जयंती/पुण्यतिथि पर विज्ञापन जारी होने हैं, उनकी लिस्ट पहले ही घोषित की जाए। एक मौके पर अलग-अलग विभागों से विज्ञापन जारी न किए जाएं।
- सरकारी विज्ञापनों में प्राइवेसी, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स, चुनावी कानूनों और कंज्यूमर प्रोटेक्शन लॉ, कॉपीराइट लॉ का ध्यान रखा जाए।
- सरकार एक लोकपाल नियुक्त करेगी जो गाइडलाइंस के उल्लंघन की शिकायतों को रिसीव कर उनपर ऐक्शन लेगा।
उल्लेखनीय है दिल्ली सरकार की ओर से आम आदमी पार्टी को जिस 163 करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस दिया गया है, उसमें 64 करोड़ तो ब्याज है
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