गलत ढंग से ली जा रही सांस है, कम उम्र में आकस्मिक मौतों और रोगों के प्रकोप के लिए उत्तरदायी..!

<p><em>वर्तमान में गरबों, जिम आदि में कम उम्र में हृदयाघात से होने वाली मौतों और बीमारियों की पृष्ठभूमि में अधिकाँश व्यक्तियों द्वारा गलत ढंग से ली जा रही सांस है।&nbsp; मैंने यह व्यक्तिगत रूप से आब्जर्व किया है कि अधिकाँश लोगों यहाँ तक कि चिकित्सा के विद्यार्थियों का सांस लेने का ढंग अवैज्ञानिक है। जब हम सांस लेते हैं तो पेट बाहर आना चाहिए परन्तु ऐसा नहीं हो रहा है। सांस लेने के लिए जो मांसपेशियां उत्तरदायी हैं, उनमें से जो मध्यपट [डायाफ्राम] नामक मुख्य मांसपेशी है, वह संकुचित होती है तो पेट के भीतर के अंगों को नीचे धकेलती है इसलिए पेट बाहर आता है ।</em></p>

गलत ढंग से ली जा रही सांस है, कम उम्र में आकस्मिक मौतों और रोगों के प्रकोप के लिए उत्तरदायी..!
29-10-2023 - 10:05 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

फिजियोलॉजी के अनुसार सामान्य श्वसन के समय प्रत्येक सांस में जो 350 से 500 मिलीलीटर वातावरणीय वायु का प्रवेश फेफड़ों में होता है, उसमें से 70 से 90% हिस्सा डायाफ्राम की सक्रियता के बलबूते होता है  परन्तु लगभग 90% लोग जब सांस लेते हैं तो पेट बाहर नहीं आता है । इसका सीधा-सीधा अर्थ है कि हर सांस के साथ शरीर को जितनी वायु मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रही है  इसलिए व्यक्ति के रक्त में प्राणवायु की पर्याप्त पूर्ति नहीं हो रही है I इसके दीर्घकालीन प्रभावों में अनेक रोगों की उत्पत्ति समाहित है । जब शरीर को पर्याप्त प्राणवायु नहीं मिलती है तो उसकी पूर्ति के लिए ह्रदय को अधिक बार धड़कना पड़ता है अर्थात् ह्रदय पर कार्यभार बढ़ जाता है क्योंकि प्राणवायु की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए शरीर में ऐसी नैसर्गिक व्यवस्था है।

इस कार्य के लिए अनुकम्पी [सिम्पेथेटिक] तंत्रिका तंत्र को अधिक काम करना पड़ता है तथा कुछ रसायनों का आवश्यकता से अधिक स्राव होता है, व्यक्ति को क्रोध, उतावलापन, आपधापी, तनाव आदि घेर लेते हैं, जो परोक्ष रूप से शरीर के रोग प्रतिरोधी तंत्र की शक्ति को क्षीण करने में सक्षम होते हैं I यह एक दुष्चक्र [विसियस साइकिल] जैसा होता है I प्राणवायु की कमी के कारण ही हर वाहन चालक हर समय एक अकारण क्रोध के साथ वाहन चलाता प्रतीत होता है, अपनी गलती होते हुए भी वह अपराधबोध के स्थान पर दूसरे पर गुर्राने लगता है I

कैंसर के कारण की खोज करने पर नोबेल पुरस्कार जीतने वाले डॉ.ओट्टो वारबर्ग के अनुसार कोशिका के स्तर पर प्राणवायु की कमी के कारण ऊर्जा के पॉवर हाउस माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर ग्लूकोज के अवायवीय श्वसन या विघटन (ऑक्सीजनविहीन यानी एनेरोबिक रेस्पिरेशन या ब्रेकडाउन) के कारण कैंसर हो सकता है।  क्योंकि, इस ऑक्सीजनविहीन ब्रेक डाउन के कारण जो सह उत्पाद उत्पन्न होते हैं, उसमें लैक्टिक एसिड होता है, जो कोशिका के स्तर पर अम्लता के लिए उत्तरदायी होता है और सारी बीमारियों की जड़ में यह दुष्टात्मा महती भूमिका निभाता है ।

एक बार मैं गुजरात प्रवास  पर था। अपने इस प्रवास के दौरान ऑक्सीजन की कमी से जूझ रही एक बीस वर्षीय गुजराती युवती को जब मैंने पेट से सांस लेने के लिए बारबार अभ्यास करवाने का प्रयास किया तो उसे बहुत असहजता अनुभव होती रही I वास्तव में पाठशालाओं में ही सही ढंग से सांस लेने का अभ्यास करना सिखाया जाना चाहिए I

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।