भारत अपनी सैन्य तैयारियां किसी देश नहीं बल्कि सुरक्षा जरूरत के अनुसार करती हैः आर हरिकुमार
भारत और चीन की नौसेना के दृष्टिकोण में बहुत बड़ा फर्क यह है कि भारतीय नौसेना की तैयारियां किसी देश के खिलाफ नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा जरूरत के हिसाब से की जाती है। यह कहना है, भारत की नौसेना के प्रमुख आर हरिकुमार का। दिल्ली में कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि हम अपनी तैयारी करते हैं और चीन की गतिविधियों पर निरंतर निगाह रखते हैं।
उन्होंने कहा, ‘हिन्द महासागर क्षेत्र में हमेशा ही करीब आठ चीनी जंगी जहाज़ रिसर्च वैसेल मौजूद रहते हैं और हम लगातार उन्हें मॉनिटर करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन का एक बेस अब जिबूती में भी है। वह हिन्द महासागर क्षेत्र में पड़ने वाले कई देशों में पोर्ट बना रहा है, जिनमें श्रीलंका, म्यांमार, पाकिस्तान सहित कई देश शामिल है।’
पाकिस्तान की नौसैनिक तैयारी के संदर्भ एडमिरल आर हरिकुमार का कहना था कि पाकिस्तान अपनी आर्थिक दिक्कतों के बावजूद लगातार अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है, विशेषतौर पर अपनी नेवी का। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान वर्ष 2035 तक 50 प्लेटफॉर्म (शिप) की फोर्स बनने के रास्ते पर चल रहा है।’ उन्होंने कहा कि ये पारंपरिक मिलिट्री चैलेंज है और इसके साथ ही आतंकवाद एक बड़ी सुरक्षा चुनौती है और इसका दायरा बढ़ता जा रहा है। हमें अदृश्य दुश्मन से एक कदम आगे रहना जरूरी होता है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, यह जंग का युग नहीं है फिर भी सेना हर जंग या कॉन्फ़्लिक्ट का अध्ययन करती है, जिससे कई तरह की चीज़ें सीखने को मिलती हैं। हम भी इस ऑपरेशन को बारीकी से समझ रहे हैं। जंग शुरू करना आसान होता है लेकिन उसे अंजाम तक पहुंचाना और जंग ख़त्म करना एक बहुत बड़ी चुनौती है।’
उन्होंने कहा कि हम रूसी हथियारों को लंबे समय से इस्तेमाल कर रहे है और ये भरोसेमंद हैं। ये हमारी ज़रूरतों को पूरा करते हैं। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना बड़ी तेज़ी से आत्मनिर्भरता की तरफ़ आगे बढ़ रही है और वर्ष 2047 तक भारतीय नौसेना पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाएगी।
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