हजारों टन के वॉरशिप को बैलेंस करती है और बाइकिंग का भी रखती है पैशन..ऐसी शख्सियत है इंडियन नेवी की डॉक मास्टर लहर सिंघल..!
<p><em>भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर लहर सिंघल डॉक मास्टर के रूप में वॉरशिप के बैलेंस की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। वो एक बाइकर भी हैं और अनेक साहसिक बाइक रैलियों में भाग ले चुकी हैं। </em></p>
भारतीय महिलाओं के बारे में कहा जाता रहा है कि वे घर और वर्क लाइफ में बैलेंस बनाने में माहिर होती हैं। बैलेंस आखिर क्या होता है ये समझिये इंडियन नेवी की लेफ्टिनेंट कमांडर लहर सिंघल से। जो नेवी में डॉक मास्टर के तौर पर 30-40 हजार टन के वॉरशिप के बैलेंस की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। ऐसा करना आसान नहीं है। लहर स्मार्ट बाइकर हैं। वे नॉर्थ-ईस्ट और लद्दाख में दो बेहद साहसिक बाइक रैली का भी हिस्सा रह चुकी हैं।
चैलेंजिंग होता है डॉक मास्टर का जॉब
नेवी में डॉक मास्टर का जिम्मा मतलब चुनौतियों से भरा काम और तकनीकी तौर पर सुपर एक्सपर्ट से कम होने पर बात नहीं बनेगी। जब वॉरशिप या सबमरीन को डॉकयार्ड (जहां शिप का मेंटिनेंस होता है) पर लाया जाता है तो इतनी भारी शिप को इस तरह लगाना होता है कि जरा सा भी बैलेंस इधर उधर ना हो। रत्ती भर भी इधर-उधर हुआ तो इतने अहम एसेट (वॉरशिप) के डैमेज होने के साथ ही काम कर रहे लोगों की जान को भी खतरा हो जाता है। लहर कहती हैं कि डॉक मास्टर का जॉब बहुत चैलेंजिंग वाला होता है। जहां गलती की जरा भी गुंजाइश नहीं होती है। डॉक मास्टर का जिम्मा संभालने के उन करीब ढाई सालों ने मेरी जिंदगी को आकार दिया और मुझे ज्यादा कॉन्फिडेंट बनाया, साथ ही टेक्निकली कॉम्पिटेंट लीडर बनाया।
पिता का सपना पूरा किया
लेफ्टिनेंट कमांडर लहर सिंघल ने अपने मिकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2014 में इंडियन नेवी जॉइन की। मेरठ के एक व्यवसायी परिवार में पैदा हुई लहर बताती हैं कि मेरठ में एक बड़ा कैंट एरिया है और मेरे पिता डिफेंस सर्विस की जिंदगी के बारे में बहुत ही आकर्षण के साथ बात करते थे। उनका डिफेंस सर्विस में जाने का सपना था पूरा नहीं हो पया। मुझे लगता है कि उनका जो लगाव था वह मुझमें आया।
नेवी में मौकों की कमी नहीं
मैंने नेवल आर्किटेक्ट के तौर पर नेवी जॉइन की, वह ऑफिसर जो वॉरशिप और सबमरीन को डिजाइन करते हैं और मेंटेन करते हैं। मेरे आगे सारे मौके और चुनौतियों की दुनिया खुल गई, जिसने मुझे और सक्षम बनाया। वह कहती हैं कि नेवी में मौकों की कमी नहीं है। मैंने यहां बाइकिंग शुरू की और नेवी के जरिए ही मैं दो बहुत ही साहिसक बाइक रैली में गई। नेवी ने मुझे यकीन दिलाया की वाकई में स्काई इज द लिमिट। वह कहती हैं कि जब हम अपनी वाइट यूनिफॉर्म पहनते हैं तो हम महिला या पुरुष नहीं होते। हम ऑफिसर होते हैं, जिनका एक खास मकसद होता है।
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