BrahMos Missiles : कोई आंख तो उठाए... 3 मिनट के भीतर होगा भस्म..! देश के तटों पर तैनात होगी सबसे खतरनाक मिसाइल
<p><em><strong>बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत अपनी रक्षा को लेकर बेहद चैकन्ना है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय तटों की सुरक्षा के लिए नेक्स्ट जेनरेशन ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम तैनात करने की योजना बनाई है। इसके लिए 1700 करोड़ रुपए की डील भी हुई है। </strong></em></p>
नौसेना की ताकत में कई गुणा इजाफा करते हुए अब भारत के संवेदनशील तटों पर दुनिया की सबसे ताकतवर सुपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात की जाएंगी। इससे भारतीय नौसेना की कई दिशाओं में हमला करने की क्षमता भी बढ़ेगी। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 1700 करोड़ रुपये का समझौता किया है। समझौते के तहत तटों के पास नेक्स्ट जेनरेशन मैरीटाइम मोबाइल कोस्टल बैटरी (लॉन्ग रेंज) और ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात किया जाएगा। ब्रह्मोस एयरोस्पेस इनकी डिलीवरी 2027 से शुरू कर देग। ये बैटरी दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस होंगी। इससे इंडियन नेवी को बहु-दिशात्मक समुद्री हमले में मदद मिलेगी। यानी नौसेना एक साथ जल, जमीन और हवा तीनों दिशाओं में हमला कर सकती है। इससे नौसेना की ताकत में बढ़ोतरी होगी।
तटों पर सतह-से-सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात किया जाएगा। इसके दो वैरिएंट्स हैं। पहला ब्रह्मोस ब्लॉक-1 और दूसरा ब्रह्मोस-एनजी। यानी जमीन पर खड़े ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर से दागी जाएंगी। यह एक तरह का ट्रक होता है, जिसमें साइलो बने होते हैं। इनके अंदर से ब्रह्मोस मिसाइलें निकलती है। इन्हें कहीं भी ले जाया जा सकता है। मिसाइल की दिशा तय की जा सकती है।
ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत और स्पीड
सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस ब्लॉक-1 मिसाइल का वजन तीन हजार किलोग्राम होता है. जबकि, ब्रह्मोस-एनजी का वजन 1200 से 1500 किलोग्राम होता है। ब्लॉक-1 ब्रह्मोस 28 फीट लंबी और ब्रह्मोस-एनजी 20 फीट लंबी होती है। ब्लॉक-1 का व्यास 2 फीट है, जबकि एनजी का 1.6 फीट है। एनजी मतलब नेक्स्ट जेनरेशन। यह ब्लॉक-1 से आकार में छोटी है लेकिन उतनी ही घातक और तेज। दोनों ही वैरिएंट्स में 200 से 300 किलोग्राम वॉरहेड लगा सकते हैं। ये पारंपरिक भी हो सकता है या फिर परमाणु हथियार भी हो सकता है. सतह से सतह पर मार करने वाले वैरिएंट्स की रेंज 800 किलोमीटर है। यह मिसाइल मैक 3.5 से ज्यादा की गति में उड़ती हैं। यानी 4330 किलोमीटर प्रतिघंटा के आसपास।
दुश्मन की नजर में नहीं आती
मिसाइल सी-स्क्रीमिंग तकनीक यानी समुद्र की सतह से नजदीक उड़ान भरने की वजह से इसे दुश्मन रडार देख नहीं पाता। इसलिए इसके आने की खबर दुश्मन को तब पता चलती है, जब उसे मौत सामने दिख रही होती है। यह मिसाइल हवा में ही रास्ता बदल सकती है और चलते-फिरते टारगेट को भी बर्बाद कर देती है। इसको मार गिराना लगभग अंसभव है। ब्रह्मोस 1200 यूनिट की ऊर्जा पैदा करती है, जो किसी भी बड़े टारगेट को मिट्टी में मिला सकती है।
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