हिजाब पर बोले जज साहब, पहनावे के अधिकार का मतलब तो कपड़े उतारने का भी अधिकार होगा

हिजाब पर बोले जज साहब, पहनावे के अधिकार का मतलब तो कपड़े उतारने का भी अधिकार होगा
08-09-2022 - 09:34 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 7 सितंबर को कहा कि कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध मामले में सवाल केवल स्कूलों में प्रतिबंध को लेकर है जबकि किसी को भी इसे कहीं और पहनने की मनाही नहीं है। शीर्ष अदालत राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध हटाने से इनकार करने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रही थी। एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ से अनुरोध किया कि इस मामले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजा जाए। सुनवाई के दौरान पीठ ने पूछा कि ‘पोशाक के अधिकार का मतलब कपड़े उतारने का भी अधिकार होगा।’
क्या सरकार हिजाब पर बैन लगा सकती है
एडवोकेट कामत ने दलील दी कि अगर कोई लडक़ी संविधान के अनुच्छेद 19, 21 या 25 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए हिजाब पहनने का फैसला करती है, तो क्या सरकार उस पर ऐसा प्रतिबंध लगा सकती है जो उसके अधिकारों का उल्लंघन करे। पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘सवाल यह है कि कोई भी आपको हिजाब पहनने से नहीं रोक रहा है। आप इसे जहां चाहें पहन सकते हैं। केवल प्रतिबंध स्कूल में है। हमारी चिंता केवल उस प्रश्न से है।’
...कपड़े उतारने का भी अधिकार होगा
जब पीठ ने पूछा, ‘पोशाक के अधिकार का मतलब कपड़े उतारने का भी अधिकार होगा।’ इस पर कामत ने कहा कि कोई भी स्कूल में कपड़े नहीं उतार रहा है। पीठ गुरुवार को भी इस मामले में दलीलें सुनना जारी रखेगी।


 

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।