मिडिल ईस्ट संकट पर भारत सतर्क..राजनाथ सिंह की अगुवाई में हाई-लेवल ग्रुप गठित, कई बड़े मंत्री शामिल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) का गठन किया है। इस समूह की अगुवाई Rajnath Singh कर रहे..
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group) का गठन किया है। इस समूह की अगुवाई Rajnath Singh कर रहे हैं।
कौन-कौन हैं इस समूह में शामिल
सूत्रों के अनुसार, इस हाई-लेवल ग्रुप में कई अहम मंत्री शामिल हैं:
- Amit Shah (गृह मंत्री)
- Nirmala Sitharaman (वित्त मंत्री)
- Hardeep Singh Puri (पेट्रोलियम मंत्री)
इसके अलावा अन्य संबंधित मंत्रालयों के मंत्री भी इस समूह का हिस्सा हैं। यह समूह मिडिल ईस्ट संकट से उत्पन्न होने वाले प्रभावों की निगरानी करेगा।
क्यों उठाया गया यह कदम
यह निर्णय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण लिया गया है, जिसमें United States, Israel और Iran के बीच संघर्ष शामिल है।
इस तनाव का सबसे बड़ा असर पड़ा है Strait of Hormuz पर, जो दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है।
- इस मार्ग में बाधा आने से भारत में LPG (रसोई गैस) की कमी का खतरा पैदा हुआ है
- संकट से पहले भारत अपनी 12–15% तेल आपूर्ति इसी मार्ग से करता था
ईंधन कीमतों को स्थिर रखने के लिए बड़े फैसले
सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं..
1. पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती
- पेट्रोल पर एक्साइज घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई
- डीजल पर एक्साइज शून्य कर दी गई
2. डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स
- डीजल निर्यात पर ₹21.5 प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाया गया
3. एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर नई ड्यूटी
- ATF पर ₹50 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लागू
- लेकिन छूट के बाद प्रभावी दर ₹29.5 प्रति लीटर रहेगी
सरकार का भरोसा: घबराने की जरूरत नहीं
Ministry of Petroleum and Natural Gas ने स्पष्ट किया है कि..
- देशभर में सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं
- पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है
- लोगों से पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) न करने की अपील की गई है
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट संकट का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, लेकिन Rajnath Singh की अगुवाई में बना यह हाई-लेवल ग्रुप और सरकार के त्वरित आर्थिक फैसले यह संकेत देते हैं कि भारत स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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