‘नमक हराम’, ‘नमाज़ बर्दाश्त नहीं’: बीजेपी सांसदों के साम्प्रदायिक बयानों पर सियासी आलोचना
एक केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि वे “नमक हराम” यानी कृतघ्नों के वोट नहीं चाहते, यह टिप्पणी बिहार विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले मुस्लिम समुदायों की ओर इशारा करती नज़र आती है और इस पर राजनीतिक स्तर पर तीखी निंदा ..
नयी दिल्ली। एक केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि वे “नमक हराम” यानी कृतघ्नों के वोट नहीं चाहते, यह टिप्पणी बिहार विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले मुस्लिम समुदायों की ओर इशारा करती नज़र आती है और इस पर राजनीतिक स्तर पर तीखी निंदा हुई है।
बेगूसराय के बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने शनिवार को अरवल जिले में एक चुनावी रैली में कहा कि जिन नागरिकों ने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाया है, उनका नैतिक दायित्व है कि वे सत्तारूढ़ दल को वोट दें। उन्होंने ऐसा लगने दिया कि वह उन मुसलमानों के बारे में बात कर रहे थे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं का लाभ लेते हैं लेकिन बीजेपी का समर्थन नहीं करते।
बयान के एक वीडियो में सिंह ने एक मौलवी के साथ बातचीत का हवाला देते हुए कहा, “तो मैंने उनसे कहा कि जो मदद का एहसान नहीं मानता उसे नमक हराम कहा जाता है।” मैंने उनसे कहा, ‘मौलवी साहब, मैं नमक हरामों के वोट नहीं चाहता।’”
रविवार (19 अक्टूबर) को आलोचना झेलने के बावजूद सिंह अपने बयान पर कायम रहे और संवाददाताओं से कहा कि उनका मकसद केवल यह दिखाना था कि सरकारी कल्याण योजनाएं किसी भेदभाव के बिना दी जाती हैं। इन टिप्पणियों पर तुरंत तीखी प्रतिक्रिया आई।
शिव सेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने मंत्री की हटाने की मांग की और पूछा, “अगर कोई आपके लिए वोट नहीं देता तो क्या उसे नमक हराम कह देना चाहिए?” बिहार कांग्रेस ने सिंह को “मानसिक रूप से अस्थिर” करार दिया।
बीजेपी के बिहार के मुख्य सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने अधिक सतर्क रुख अपनाया। प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मतदाता “ऐसी टिप्पणियों से परे निर्णय लेते हैं”, जबकि पार्टी के एक अन्य नेता ने सिंह का बचाव किया।
मंत्री के बयान के साथ ही वीकेंड में बीजेपी नेताओं से जुड़ी साम्प्रदायिक रंगत वाली कई घटनाएँ चर्चा में रहीं।
पुणे में रविवार को राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने पतित पावन संगठन और अन्य हिंदू संगठनों के साथ ऐतिहासिक शानीवारवाडा किले पर एक प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
एक वीडियो में दिखा कि वहाँ मुस्लिम महिलाएँ प्रार्थना कर रही थीं; कुलकर्णी और कार्यकर्त्ताओं ने गोरुत्ते से उस स्थान को “शुद्ध” किया और हिंदू अनुष्ठान किया।
उन्होंने प्रदर्शन से पहले ट्वीट किया था, “हम शानीवारवाडा में नमाज़ की अनुमति नहीं देंगे, हिंदू समुदाय अब जाग गया है।” बाद में उन्होंने अपने कृत्य की रक्षा करते हुए कहा, “यह हिंदवी स्वराज का प्रतीक है… हम किसी को भी यहाँ नमाज़ करने की अनुमति नहीं दे सकते। यह मस्जिद नहीं है।”
इस कदम को स्थानीय निकाय चुनावों से पहले मतों को ध्रुवीकृत करने का प्रयास बताते हुए राजनीतिक विपक्ष ने कड़ी निंदा की। महाराष्ट्र कांग्रेस के सचिन सावंत ने किले के विविध ऐतिहासिक स्वरूप का हवाला देते हुए कहा, “बीजेपी सांसद शानीवारवाडा के बाहर ‘दारगाह’ के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रही हैं। जब पेशवाओं को कोई आपत्ति नहीं थी, तो इन्हें क्या समस्या है?”
अलग घटना में एक वीडियो में बीजेपी नेता प्रज्ञा ठाकुर ने माता-पिता से अपनी बेटियों को काबू में रखने के लिए हिंसा का सुझाव देते हुए कहा कि वे उन लड़कियों के खिलाफ सख्ती बरतें जो “गैर-मुस्लिम” घर जाकर लौटती हैं। उन्होंने कहा कि जो बेटियाँ “लक्ष्मी या सरस्वती” के रूप में पाली जाती हैं, वे बड़ी होकर “मियाँनी”(मुस्लिम पुरुष की पत्नी के लिए अपमानजनक शब्द) बन जाती हैं।
“अपने मन को इतना मज़बूत करो कि अगर हमारी बेटी हमारी नहीं माने, अगर वह किसी अनिधर्मी (non-believer) के घर जाती है, तो उसके पैर तोड़ने तक पीछे मत हटो,” उन्होंने कहा।
उन्होंने जो भी कठोर अनुशासन का समर्थन करने को कहा, उसे बच्चों की भलाई के लिए उचित ठहराया।
ये घटनाएँ इस बीच सामने आई हैं जब बिहार चुनाव करीब हैं — पहले चरण के मतदान की तारीख 6 नवंबर है, दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को है, और मतगणना 14 नवंबर को होगी।
प्रमुख तिथियाँ (सारांश तालिका)
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घटना/विवाद |
तिथि/निर्दिष्ट जानकारी |
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गिरिराज सिंह का विवादित बयान |
अक्टूबर 2025 (रैली — अरवल, बिहार) |
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आलोचनात्मक प्रतिक्रिया व कायम रहने की स्थिति |
19 अक्टूबर, 2025 |
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पुणे—शानीवारवाडा घटना (मेधा कुलकर्णी) |
सप्ताहांत में (अक्टूबर 2025) |
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बिहार चुनाव — चरण 1 मतदान |
6 नवम्बर, 2025 |
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बिहार चुनाव — चरण 2 मतदान |
11 नवम्बर, 2025 |
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मतगणना |
14 नवम्बर, 2025 |
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