“अस्वीकार्य और ग़लत जानकारी पर आधारित”: पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद रोधी समिति का उपाध्यक्ष बनाए जाने पर विपक्ष का यूएनएससी पर हमला
पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आतंकवाद रोधी समिति (Counter Terrorism Committee) का उपाध्यक्ष और तालिबान प्रतिबंध समिति (Taliban Sanctions Committee) का अध्यक्ष बनाए जाने पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है..
नयी दिल्ली। पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आतंकवाद रोधी समिति (Counter Terrorism Committee) का उपाध्यक्ष और तालिबान प्रतिबंध समिति (Taliban Sanctions Committee) का अध्यक्ष बनाए जाने पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस फैसले को “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, ग़लत जानकारी पर आधारित और अस्वीकार्य” बताया।
खड़गे ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, “15 सदस्यीय यूएनएससी की आतंकवाद रोधी समिति का उपाध्यक्ष और तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष पाकिस्तान को बनाए जाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ग़लत समझ और असंवेदनशीलता को दर्शाता है।”
इसके अलावा पाकिस्तान को "Documentation and Other Procedural Questions" पर आधारित अनौपचारिक कार्य समूहों (Informal Working Groups) का सह-अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया है।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और पाकिस्तान को एक साथ रखे जाने की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए उचित कूटनीतिक कदम उठाए।
विपक्ष का तीखा हमला
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी यूएनएससी के फैसले को लेकर नाराज़गी जताई और तीखे लहजे में कहा, “Repeat after me, UNSC is a joke!”
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने इस पूरे घटनाक्रम को भारत की “विदेश नीति की विफलता” करार दिया। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के बाद IMF और वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को $1 बिलियन और $40 बिलियन की सहायता दी। ADB ने भी 3 जून को $800 मिलियन दिए। और 4 जून को पाकिस्तान को यूएनएससी की तालिबान समिति का अध्यक्ष और आतंकवाद रोधी समिति का उपाध्यक्ष बना दिया गया। यह हमारी विदेश नीति की गिरती स्थिति का प्रमाण है।”
खेड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आखिर कैसे उस पाकिस्तान को मान्यता दे रहा है जो दशकों से आतंकवाद का प्रायोजक रहा है।
खड़गे ने FATF की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान को फिर से शामिल करने की मांग की। खड़गे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह “पाकिस्तान से उत्पन्न आतंकवाद” के खिलाफ भारत के रुख को समझे और उसका समर्थन करे। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान आतंक का जनक है, भारत आतंक का शिकार है। दोनों को एक बराबर नहीं ठहराया जा सकता।”
खड़गे ने पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में फिर से शामिल करने की मांग की ताकि उसके आतंक वित्त पोषण की निगरानी की जा सके। उन्होंने बताया कि भारत की कूटनीतिक कोशिशों से 2008 और 2012 में और फिर 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया था।
उन्होंने कहा कि IMF और वर्ल्ड बैंक की ओर से पाकिस्तान को दी गई मदद उसके सैन्य खर्च को बढ़ाएगी, जिसका दुरुपयोग भारत के खिलाफ आतंक फैलाने में होता है।
खड़गे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भी याद दिलाया कि 9/11 हमलों के मुख्य आरोपी ओसामा बिन लादेन और खालिद शेख मोहम्मद दोनों पाकिस्तान में ही पाए गए और वहीं मारे गए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से जवाबदेही की मांग सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे विश्व समुदाय के लिए आवश्यक है।
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