मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर शशि थरूर का बयान, लोकसभा में रात 2 बजे दिया भाषण
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार, 3 अप्रैल को लोकसभा में रात 2 बजे दिए गए अपने भाषण को ‘असामान्य अनुभव’ बताया। यह भाषण उन्होंने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर चर्चा के दौरान दिया। हालांकि, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी को लागू कर दिया गया था, लेकिन संसद की मंजूरी लंबित थी।
नयी दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार, 3 अप्रैल को लोकसभा में रात 2 बजे दिए गए अपने भाषण को ‘असामान्य अनुभव’ बताया। यह भाषण उन्होंने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर चर्चा के दौरान दिया। हालांकि, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन 13 फरवरी को लागू कर दिया गया था, लेकिन संसद की मंजूरी लंबित थी। बुधवार को 14 घंटे की लंबी बहस के बाद इसे ध्वनि मत से पारित किया गया।
थरूर का सोशल मीडिया पोस्ट
शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "कल रात मुझे असामान्य अनुभव हुआ, जब मैंने रात 2 बजे संसद में भाषण दिया! लोकसभा ने गृह मंत्री के उस प्रस्ताव पर चर्चा की, जिसमें मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पुष्टि की गई। यह चर्चा तब हुई जब वक्फ संशोधन विधेयक पर लंबी बहस और मतदान के बाद रात 2 बजे इसका नंबर आया।"
लोकसभा में शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस इस प्रस्ताव का समर्थन करती है, लेकिन मणिपुर में शांति और स्थिरता बहाल करना जरूरी है।
उन्होंने कहा, "उग्रवाद समाप्त करें, शांति और स्थिरता बहाल करें, परस्पर संवाद को बढ़ावा दें और समावेशिता को प्रोत्साहित करें।"
उन्होंने राष्ट्रपति शासन को "इलाज का अवसर" बताते हुए कहा, "यह अवसर व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। राष्ट्रपति शासन को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए जिससे मणिपुर में स्थिरता लाई जा सके।"
मणिपुर में हिंसा पर थरूर का बयान
लोकसभा में शशि थरूर ने कहा कि मणिपुर में पिछले 21 महीनों में जारी हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 300 से भी अधिक बताई गई है।
उन्होंने कहा कि मणिपुर में अब तक 11 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है, जो भारत के किसी भी राज्य में सबसे अधिक बार है।
उन्होंने राज्य में अवैध घुसपैठ, नशा तस्करी, कम विकास, सीमित औद्योगीकरण, बेरोजगारी और खराब बुनियादी ढांचे जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025
गुरुवार तड़के लोकसभा ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को पारित किया, जिसमें 288 सांसदों ने पक्ष में और 232 सांसदों ने विरोध में मतदान किया।
किसी भी विधेयक को पारित करने के लिए 272 मतों की आवश्यकता होती है, जो कि इस विधेयक को प्राप्त हुए।
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