‘क्या हम ब्रह्मोस खरीद सकते हैं?’: पाकिस्तानी जनरल को मिला मिसाइल निर्माता का करारा जवाब
दुबई में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय हथियार प्रदर्शनी में उस वक्त सबका ध्यान खींचा गया जब पाकिस्तान सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत के एक मिसाइल वैज्ञानिक से चौंकाने वाला सवाल पूछा, "क्या भारत कभी पाकिस्तान को ब्रह्मोस मिसाइल बेचेगा?..
नयी दिल्ली। दुबई में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय हथियार प्रदर्शनी में उस वक्त सबका ध्यान खींचा गया जब पाकिस्तान सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत के एक मिसाइल वैज्ञानिक से चौंकाने वाला सवाल पूछा, "क्या भारत कभी पाकिस्तान को ब्रह्मोस मिसाइल बेचेगा?"
डॉ. अपथुकथा शिवथानु पिल्लई, जो इस स्वदेशी मिसाइल प्रणाली के जनक माने जाते हैं, ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया, "पाकिस्तान के लिए तो यह मुफ़्त में होगी।"
हॉल में सन्नाटा छा गया। संदेश स्पष्ट था — यह सिर्फ व्यंग्य नहीं, चेतावनी भी थी।
यह संवाद सिर्फ एक सामान्य मजाक नहीं था। यह उस समय हुआ जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था।
भारत ने हाल ही में 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में "ऑपरेशन सिंदूर" चलाया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
इसके बाद पाकिस्तान की ओर से मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमला किया गया, जिस पर नई दिल्ली ने करारा पलटवार किया।
रावलपिंडी, चकवाल और रहीम यार खान जैसे ठिकानों को भारत ने सफलतापूर्वक निशाना बनाया।
स्कर्दू, भोलारी और जैकोबाबाद एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचा।
सियालकोट और पसरूर की रडार प्रणालियों को भी भारत के सटीक हमलों ने ध्वस्त कर दिया।
इस पूरे जवाबी अभियान के केंद्र में था ब्रह्मोस मिसाइल — भारत और रूस की साझेदारी से जन्मी, लेकिन भारतीय नवाचार से परिपक्व हुई एक अत्याधुनिक मिसाइल।
ब्रह्मोस केवल एक हथियार नहीं है..
- यह दो चरणों में काम करता है।
- पहला चरण: ठोस ईंधन वाला बूस्टर इसे सुपरसोनिक गति पर पहुंचाता है।
- दूसरा चरण: तरल-ईंधन रैमजेट इंजन इसे माच 3 की रफ्तार तक ले जाता है।
- इसकी स्टेल्थ तकनीक और अत्याधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली इसे बेहद सटीक और घातक बनाती है।
ब्रह्मपुत्र और मॉस्कवा नदियों के नाम पर रखी गई यह मिसाइल केवल तकनीक नहीं, भारत की शक्ति और संप्रभुता का प्रतीक है।
भारत अब इसे पूरी तरह स्वदेशी बनाने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। निजी कंपनियों से लेकर सरकारी अनुसंधान संस्थान तक इसकी प्रणाली को और मजबूत, सटीक और आत्मनिर्भर बना रहे हैं — ताकि भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता हमेशा तीखी बनी रहे।
ऐसे में जब पाकिस्तान ने पूछा, "क्या हम ब्रह्मोस खरीद सकते हैं?" डॉ. पिल्लई का जवाब सिर्फ चुटीला ही नहीं था, बल्कि रणनीतिक रूप से गूढ़ भी था। कुछ चीजें बेचने के लिए नहीं होतीं, खासकर जब खरीदार सीधे निशाने पर हो।
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