मेरे गुरु को परमात्मा घोषित करो, सर्वोच्च न्यायालय में आई ऐसी जनहित याचिका..!
<p><em><strong>गुरु शिष्य परंपरा हमारे देश में प्राचीन काल से चली आ रही है पर अपने गुरु के प्रति प्रेम और आस्था की अति तब हो गई जब एक शिष्य में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दी कि मेरे गुरु को परमात्मा घोषित करें।</strong></em></p>
शिष्य उपेंद्र नाथ दलाई ने अपने आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री अनुकूल चंद्र ठाकुर के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगाकर अजीबोगरीब मांग की। उसकी मांग थी कि श्रीश्री ठाकुर के धर्म-समाज में योगदान को देखते हुए उच्चतम न्यायालय उनको परमात्मा मानने का निर्देश जारी दे। उपेंद्न नाथ ने अदालत में एक जनहित याचिका लगाई जिसमें उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, इस्कॉन समिति, गुरुद्वारा बंगला साहिब, बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया, काउंसिल, नेशनल क्रिश्चिएन, आरएसएस और भाजपा को भी पार्टी बनाया गया था।
कोर्ट ने पांच मिनट में ही खारिज की याचिका
इस जनहित याचिका को जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने खारिज करते हुए कहा कि भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है। जस्टिस शाह बोले कि आप दूसरों पर क्यों उन्हें परमात्मा मानने का थोप रहे हैं। आप उन्हें परमात्मा मानना चाहते हैं तो मानें। हम यहां आपका लेक्चर सुनने नहीं,सुनाने आए हैं। हम धर्मनिरपेक्ष देश हैं। सबको पूरा अधिकार है, इस देश में कि जिसको जो धर्म मानना है, माने। याचिकाकर्ता को इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह देश के लोगों को श्रीश्री अनुकूल चंद्र को परमात्मा मानने के लिए जबरदस्ती करवाए।
कोर्ट ने ठोक दिया एक लाख का जुर्माना
उपेंद्र नाथ दलाई की दलीलों के बाद कोर्ट ने इस याचिका को जनहित में नहीं पाया इसलिए उस पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। उपेंद्र नाथ दलाई की दलीलों के बाद कोर्ट ने इस याचिका को जनहित में नहीं पाया इसलिए उस पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। उपेंद्र की जुर्माना नहीं लगाने की गुजारिश पर जस्टिस शाह ने कहा, हमने तो कम जुर्माना लगाया। किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह जनहित याचिका का दुरुपयोग करे। अब लोग ऐसी याचिका लगाने से पहले कम से कम चार बार सोचेंगे।
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