उदयपुर फाइल्स: कोई लिखित आदेश नहीं, केवल अर्जेंट लिस्टिंग से इनकार किया गया.. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उसने फिल्म "उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर" की स्क्रीनिंग के खिलाफ दायर याचिका को तत्काल सूचीबद्ध (urgent listing) करने से इनकार करने का कोई लिखित आदेश पारित नहीं..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उसने फिल्म "उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर" की स्क्रीनिंग के खिलाफ दायर याचिका को तत्काल सूचीबद्ध (urgent listing) करने से इनकार करने का कोई लिखित आदेश पारित नहीं किया था।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह स्पष्टता उस समय दी जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (आरोपी मोहम्मद जावेद की ओर से पेश) ने कहा कि पीठ की मौखिक टिप्पणी "फिल्म को रिलीज़ होने दीजिए" के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।
सिब्बल ने जब स्पष्टीकरण मांगा, तो पीठ ने कहा कि उन्होंने यह टिप्पणी जरूर की थी, लेकिन कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया, बल्कि केवल तत्काल सुनवाई की मांग को अस्वीकार किया गया था।
कपिल सिब्बल ने कहा कि फिल्म की 11 जुलाई को प्रस्तावित रिलीज के चलते आरोपियों के मुकदमे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां से उन्हें 9 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट आदेश को स्पष्ट कराने को कहा गया।
"याचिका की कोई सुनवाई नहीं हुई और अदालत की मौखिक टिप्पणी के कारण भ्रम उत्पन्न हुआ है," सिब्बल ने दलील दी।
इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि फिल्म नहीं दिखाई जानी चाहिए, जबकि न्यायमूर्ति धूलिया ने स्पष्ट किया कि अदालत ने सिर्फ अर्जेंट हियरिंग नहीं दी थी, और कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।
क्या हुआ था 9 जुलाई को?
9 जुलाई को, सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की स्क्रीनिंग के खिलाफ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था और मौखिक रूप से कहा था:
"फिल्म को रिलीज़ होने दीजिए। आप ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियमित पीठ के समक्ष याचिका पेश करें।"
यह टिप्पणी उस समय की गई थी जब हत्या के मामले में एक आरोपी के वकील ने कहा कि फिल्म की रिलीज मुकदमे को प्रभावित कर सकती है और इससे न्याय की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता का तर्क क्या है?
यह याचिका मोहम्मद जावेद द्वारा दायर की गई है, जो हत्या के मामले में आठवां आरोपी है और जो एनआईए कोर्ट में मुकदमे का सामना कर रहा है। याचिका में मांग की गई थी कि:
- जब तक मुकदमा पूरा नहीं हो जाता,
- फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए।
याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म के ट्रेलर और प्रचार सामग्री से ऐसा प्रतीत होता है कि यह "सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ" है,
और यह फिल्म आरोपियों को दोषी दर्शा रही है, जिससे चल रहे ट्रायल पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
क्या है कन्हैया लाल हत्याकांड?
कन्हैया लाल, एक उदयपुर (राजस्थान) निवासी दर्जी, की जून 2022 में हत्या कर दी गई थी।
आरोप है कि उन्हें मोहम्मद रियाज़ और मोहम्मद गौस ने घृणा अपराध के चलते मारा।
बाद में हत्यारों ने वीडियो जारी कर कहा था कि हत्या, भाजपा नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने की प्रतिक्रिया में की गई थी।
इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा की गई थी और आरोपियों पर UAPA और भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मुकदमा जयपुर की विशेष NIA अदालत में लंबित है।
यह मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों और लिखित आदेश की गैर-मौजूदगी को लेकर संवेदनशील हो गया है, क्योंकि फिल्म की रिलीज से न्याय प्रक्रिया के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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