'चिकन 800 रुपये/किलो, चावल 340 रुपये/किलो': क्या भारत के साथ युद्ध झेल सकती है पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था?
पाकिस्तान इन दिनों अपने इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में महंगाई चरम पर है और खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, चिकन की कीमत 798.89 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि चावल लगभग 340 रुपये प्रति किलो बिक रहा है..
नयी दिल्ली। पाकिस्तान इन दिनों अपने इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में महंगाई चरम पर है और खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर, चिकन की कीमत 798.89 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि चावल लगभग 340 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
अन्य आवश्यक वस्तुएं जैसे अंडे और दूध भी महंगे हो गए हैं, अंडे 332 रुपये प्रति दर्जन और दूध 224 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
खाद्य असुरक्षा के कारण 1 करोड़ से अधिक लोग भुखमरी के कगार पर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान अपनी चरमराती आर्थिक स्थिति में भारत के साथ सैन्य संघर्ष का जोखिम उठा सकता है?
पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा और कृषि संकट
विश्व बैंक की भविष्यवाणी के अनुसार, प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों के चलते पाकिस्तान की प्रमुख फसलें जैसे चावल और मक्का बुरी तरह प्रभावित होंगी। इससे खाद्य संकट और बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट बताती है कि चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान में 1 करोड़ से अधिक लोग भुखमरी के खतरे में होंगे, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जहां कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
देश में महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। ब्रेड, आलू, टमाटर और फलों जैसी बुनियादी चीजों के दाम भी काफी बढ़ गए हैं, जिससे लाखों परिवारों के लिए सामान्य भोजन भी मुश्किल हो गया है।
भारत के साथ बढ़ते तनाव और पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली
जहां पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार फिसल रही है, वहीं भारत के साथ तनाव भी बढ़ गया है, खासकर 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद।
इस हमले में 25 से अधिक पर्यटकों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमले के जिम्मेदारों और उनके 'आकाओं' को कठोर दंड दिया जाएगा। इससे पाकिस्तान पर राजनयिक दबाव और बढ़ गया है, और देश की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई है।
भारत-पाकिस्तान व्यापार संबंधों पर असर
भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध भी तनावपूर्ण हैं। हालांकि अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 के बीच पाकिस्तान ने भारत से आधिकारिक रूप से 450 मिलियन डॉलर का आयात किया है, लेकिन अप्रत्यक्ष व्यापार कहीं ज्यादा है, लगभग 10 अरब डॉलर वार्षिक। ये वस्तुएं, मुख्यतः दवाइयां और चीनी, दुबई और सिंगापुर जैसे तीसरे देशों के जरिये आयात होती हैं, क्योंकि सीधे व्यापार पर राजनीतिक तनाव के कारण रोक है।
फिर भी, पाकिस्तान आर्थिक रूप से बेहद अस्थिर स्थिति में है। देश में मुद्रास्फीति दर 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे वह एशिया का सबसे महंगा देश बन गया है।
वहीं दूसरी ओर भारत आर्थिक प्रगति की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
स्थिति गंभीर, आगे की राह कठिन
भारी महंगाई, खाद्य असुरक्षा और आर्थिक गिरावट से जूझते पाकिस्तान के लिए भारत के साथ बढ़ता तनाव और हालिया आतंकी घटनाओं का प्रभाव स्थिति को और भी भयावह बना रहा है।
देश के सामने आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां हैं। दस लाख से अधिक पाकिस्तानी नागरिक बढ़ती महंगाई और भुखमरी के खतरे का सामना कर रहे हैं।
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