क्या भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने की ‘प्रतिबद्धता’ जताई? जयशंकर ने ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर सख्त संदेश दिया
भारत ने शनिवार को एक बार फिर अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” (Strategic Autonomy) की नीति को दोहराया। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार यह दावा कर रहा है कि नई दिल्ली ने रूसी तेल की खरीद बंद करने पर ‘सहमति’ जता दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह बयान विपक्ष के लगातार विरोध और उन आरोपों के बीच आया है, जिनमें कहा जा रहा है कि..
भारत ने शनिवार को एक बार फिर अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” (Strategic Autonomy) की नीति को दोहराया। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार यह दावा कर रहा है कि नई दिल्ली ने रूसी तेल की खरीद बंद करने पर ‘सहमति’ जता दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह बयान विपक्ष के लगातार विरोध और उन आरोपों के बीच आया है, जिनमें कहा जा रहा है कि भारत सरकार ने वॉशिंगटन के आगे ‘समर्पण’ कर दिया है।
जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा,
“हम रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि यह हमारे इतिहास और हमारे विकास का अहम हिस्सा रही है। यह बहुत गहराई से जुड़ा हुआ सिद्धांत है और यह राजनीतिक मतभेदों से परे, पूरे राजनीतिक स्पेक्ट्रम में स्वीकार किया गया विचार है।”
विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक तेल बाज़ार बेहद जटिल और लगातार बदलने वाला है। ऐसे में देशों को बार-बार अपनी गणनाओं और साझेदारियों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के लिए ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले व्यावसायिक (कमर्शियल) आधार पर ही होते रहेंगे।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही भारत हर मुद्दे पर सभी साझेदारों से सहमत न हो, लेकिन संवाद बनाए रखना और साझा सहमति तलाशने की इच्छा अहम है।
ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर जयशंकर ने कहा,
“आज ऊर्जा का बाज़ार बहुत जटिल है। भारत की तेल कंपनियाँ, जैसे यूरोप और शायद दुनिया के अन्य हिस्सों की कंपनियाँ, उपलब्धता, लागत और जोखिम को देखते हुए फैसले लेती हैं, जिन्हें वे अपने हित में सबसे बेहतर मानती हैं। बहुत सी चीज़ें बदल रही हैं और हम में से कई अपने आकलन बार-बार कर रहे हैं।”
टैरिफ में सशर्त राहत
इस महीने की शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत टैरिफ घटाए गए और रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए कड़े 25% अतिरिक्त कर (सेस) को सशर्त रूप से हटाया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि भारत सक्रिय रूप से रूसी तेल के विकल्प तलाश रहा है और अपनी ज़रूरतों के लिए अमेरिका की ओर रुख कर रहा है।
हालाँकि ट्रंप प्रशासन के ये दावे अभी तक भारत की ओर से औपचारिक रूप से दोहराए नहीं गए हैं। विदेश मंत्रालय ने इस सप्ताह की शुरुआत में फिर स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति “राष्ट्रीय हितों” के आधार पर तय होती है।
इसी बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुधवार को कहा कि ट्रंप दुनिया के इकलौते ऐसे नेता प्रतीत होते हैं, जो भारत की ओर से इस तरह के किसी ‘प्रतिबंध’ की घोषणा कर रहे हैं।
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को ज़ोर देते हुए कहा,
“संयुक्त राज्य अमेरिका ने रूस के तेल पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए हैं। भारत के साथ हमारी बातचीत में हमें उनकी ओर से अतिरिक्त रूसी तेल की खरीद रोकने की प्रतिबद्धता मिली है। यूरोप भी इस दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा चुका है।”
कुल मिलाकर, भारत ने एक बार फिर साफ संकेत दिया है कि वह अपनी ऊर्जा नीति और विदेश नीति के फैसले किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय और व्यावसायिक हितों के आधार पर ही लेता रहेगा, और रणनीतिक स्वायत्तता उसके दृष्टिकोण का मूल स्तंभ बनी रहेगी।
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