12 राज्यों में SIR की समयसीमा एक सप्ताह बढ़ी, अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी होगी
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने रविवार को घोषणा की कि उसने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के कार्यक्रम में संशोधन किया है और सभी संबंधित समयसीमाओं को एक सप्ताह बढ़ा दिया है। यह पुनरीक्षण 1 जनवरी 2026 को अर्हता तिथि मानकर किया जा..
नयी दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने रविवार को घोषणा की कि उसने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के कार्यक्रम में संशोधन किया है और सभी संबंधित समयसीमाओं को एक सप्ताह बढ़ा दिया है। यह पुनरीक्षण 1 जनवरी 2026 को अर्हता तिथि मानकर किया जा रहा है।
आयोग ने अपने बयान में कहा कि उसने “12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 01.01.2026 को अर्हता तिथि मानते हुए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए सभी संबंधित तिथियों को एक सप्ताह बढ़ाते हुए संशोधित कार्यक्रम जारी किया है।”
नये समय-निर्धारण के अनुसार..
- मतदाता गणना (enumeration) तथा मतदान केंद्रों के युक्तिकरण/पुनर्गठन की प्रक्रिया 11 दिसंबर 2025 (गुरुवार) तक पूरी की जाएगी।
- नियंत्रण तालिका (control table) का अद्यतन तथा प्रारूप मतदाता सूची (draft roll) का निर्माण 12–15 दिसंबर 2025 (शुक्रवार से सोमवार) के बीच होगा।
- प्रारूप मतदाता सूची 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को प्रकाशित की जाएगी।
- दावे और आपत्तियाँ 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 (मंगलवार से गुरुवार) तक दाखिल की जा सकेंगी।
- नोटिस चरण, जिसमें जारी करना, सुनवाई, सत्यापन और दावे/आपत्तियों का निस्तारण शामिल है, 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 (शनिवार) तक जारी रहेगा।
- मतदाता सूची के स्वास्थ्य मानकों की जाँच और अंतिम प्रकाशन के लिए आयोग से अनुमोदन लेने की अंतिम तारीख 10 फरवरी 2026 (मंगलवार) तय की गई है।
- अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 (शनिवार) को प्रकाशित होगी।
यह प्रेस नोट निर्वाचन आयोग के सहायक निदेशक (AD), अपूर्व कुमार सिंह द्वारा जारी किया गया।
12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में SIR और बढ़ता राजनीतिक तनाव
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत 6 नवंबर को नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में हुई थी, जिसके बाद कई क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज हो गईं।
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस प्रक्रिया को “ठगी” (con job) बताते हुए इसे “समझौता कर चुकी” चुनावी संस्था की कार्रवाई करार दिया।
- तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK और उसके सहयोगियों ने भी इस मतदाता सूची शुद्धिकरण कार्यक्रम का विरोध किया है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) मतदाताओं को अर्ध-भरी हुई गणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं और उन्हें आवश्यक विवरण भरने में सहायता कर रहे हैं।
पहले घोषित कार्यक्रम के अनुसार SIR की गणना प्रक्रिया 4 दिसंबर तक, प्रारूप सूची 9 दिसंबर को और अंतिम सूची 7 फरवरी को प्रकाशित होनी थी।
दूसरे चरण में शामिल 12 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश हैं:
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।
कोई चुनाव वाले राज्य: तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल
इनमें से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 में चुनाव होने हैं।
असम में भी 2026 में चुनाव हैं, लेकिन वहाँ नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है, इसलिए वहां की SIR प्रक्रिया अलग से घोषित की जाएगी।
यह SIR का दूसरा चरण है। पहला चरण बिहार में पूरा हुआ था, जहाँ अंतिम मतदाता सूची 7.42 करोड़ नामों के साथ 30 सितंबर को जारी की गई थी।
पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया खास तौर पर राजनीतिक टकराव का कारण बनी हुई है—जहाँ 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह BJP और TMC के बीच नया संघर्ष बिंदु बन गई है।
- BJP इस कदम को पारदर्शिता बढ़ाने वाली पहल बता रही है।
- TMC ने इसके समय और उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए इसे “दबाव में लिया गया निर्णय” कहा है।
TMC नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने इसे “एक पूरी तरह समझौता कर चुकी संस्था द्वारा आयोजित ठगी” बताया है।
राजनीतिक विश्लेषक इसे “दो ताक़तों—प्रशासनिक और संगठनात्मक—के बीच संघर्ष” के रूप में देख रहे हैं।
तमिलनाडु में DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस SIR को चुनौती दी है और इसे “व्यवहार में NRC” बताते हुए 27 अक्टूबर की EC अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है।
वहीं, AIADMK (जो BJP की सहयोगी है) इस प्रक्रिया का समर्थन कर रही है।
What's Your Reaction?