“यह केवल प्रियंक खड़गे का निजी बयान”: RSS ने बैन की मांग पर दिया जवाब, प्रणब मुखर्जी का किया ज़िक्र
कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर संघ ने कड़ा जवाब दिया है। संघ ने इसे खड़गे का “निजी बयान” करार देते हुए कहा कि यह कांग्रेस की आधिकारिक राय नहीं है..
नयी दिल्ली। कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर संघ ने कड़ा जवाब दिया है। संघ ने इसे खड़गे का “निजी बयान” करार देते हुए कहा कि यह कांग्रेस की आधिकारिक राय नहीं है और पार्टी के किसी अन्य नेता ने इस बयान का समर्थन नहीं किया है।
एक वरिष्ठ संघ पदाधिकारी ने कहा, “यह प्रियंक खड़गे का निजी बयान है। कांग्रेस ने अतीत में तीन बार संघ पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन के रूप में हम दो लाख से अधिक सेवा कार्य कर रहे हैं। हमें रतन टाटा, अज़ीम प्रेमजी जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने भी सराहा है, जिनके फाउंडेशन कई कार्यक्रमों से जुड़े हैं।”
प्रणब मुखर्जी का ज़िक्र
RSS पदाधिकारी ने पूर्व राष्ट्रपति और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी का हवाला देते हुए कहा, “हमने देखा है कि प्रणब मुखर्जी न केवल संघ की सराहना कर चुके हैं बल्कि मुख्यालय भी आए थे।”
उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे कई कांग्रेस नेताओं से भी संघ के संबंध सौहार्दपूर्ण रहे हैं।
प्रियंक खड़गे ने क्या कहा था?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने हाल ही में कहा था, “अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो RSS पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह संगठन समाज में नफरत फैलाता है और कानून के दायरे में नहीं चलता।”
उन्होंने संघ पर कई ऐतिहासिक आरोप लगाए, जैसे..
- दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम के किसी भी बड़े आंदोलन में हिस्सा न लेना।
- महात्मा गांधी की हत्या के बाद मिठाई बांटना।
- संविधान के बजाय मनुस्मृति लागू करने की वकालत करना।
- स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर तिरंगे का विरोध करना।
जब उनसे पूछा गया कि यह प्रतिबंध कैसे लागू किया जाएगा, तो उन्होंने कहा, “यह विधायिका का कार्य है, और हम संविधान के दायरे में आवश्यक कानून बनाएंगे।”
RSS का जवाब
RSS ने इन आरोपों को “गंभीरता से न लेने लायक” बताते हुए कहा कि कांग्रेस में क्या संभावनाएं हैं, यह सभी को पता है।
संघ पदाधिकारी ने कहा:“यह कांग्रेस की आधिकारिक राय नहीं है। पार्टी में कई वरिष्ठ नेताओं के साथ हमारे अच्छे संबंध रहे हैं। महात्मा गांधी और प्रणब मुखर्जी जैसे नेताओं ने हमारे कार्यों की प्रशंसा की है। ऐसे में यह बयान केवल व्यक्तिगत राजनीति का हिस्सा लगता है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब सरदार पटेल ने 1948 में आरएसएस पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाया था, तब उन्होंने संघ की भूमिका की सराहना की थी।
विवाद का राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में लोकसभा चुनाव की तैयारियों की पृष्ठभूमि में RSS और BJP पर राजनीतिक हमले तेज़ हो रहे हैं। कांग्रेस जहां संघ को भाजपा की विचारधारा का स्त्रोत मानती है, वहीं भाजपा संघ को एक राष्ट्रवादी, सांस्कृतिक संगठन बताती है जो राजनीति से अलग है।
What's Your Reaction?