20,000 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल गिरफ्तार, बहु-शहर तलाश के बाद दिल्ली से पकड़े गए
राजस्थान में कथित 20,000 करोड़ रुपये के Jal Jeevan Mission घोटाले में फरार चल रहे पूर्व IAS अधिकारी Subodh Agarwal को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया। राजस्थान की Anti-Corruption Bureau (ACB) ने उन्हें नई दिल्ली से हिरासत में लिया।
इससे पहले जयपुर की एक अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसके बाद से वे लगातार गिरफ्तारी से बच रहे थे।
फर्जी दस्तावेजों से ठेके हासिल करने का आरोप
ACB अधिकारियों के अनुसार, दो निजी कंपनियों ने बोली प्रक्रिया के दौरान IRCON International Limited (IRCON) द्वारा जारी कथित ‘लेटर ऑफ अवॉर्ड’ और फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificates) जमा किए।
इन दस्तावेजों के आधार पर जल जीवन मिशन के तहत ठेके हासिल किए गए।
जब राजस्थान के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग (PHED) के अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने इन प्रमाण पत्रों की जांच कराई, तो IRCON के बेंगलुरु कार्यालय ने इन्हें फर्जी बताया।
बताया जा रहा है कि इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए गए।
टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता
ACB के महानिदेशक Govind Gupta के अनुसार, एक और गंभीर आरोप यह है कि सुबोध अग्रवाल (तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव, PHED) और अन्य अधिकारियों ने 50 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के टेंडर में “साइट विजिट सर्टिफिकेट” अनिवार्य कर दिया।
यह नियमों के खिलाफ था और इससे बोली लगाने वाली कंपनियों की पहचान उजागर हो जाती थी, जबकि प्रक्रिया में गोपनीयता जरूरी होती है।
इस वजह से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हुई और 30–40% तक अधिक प्रीमियम पर टेंडर पास हुए। ऐसे टेंडरों की कुल कीमत लगभग 20,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिन्हें कथित तौर पर PHED अधिकारियों ने मंजूरी दी।
कई शहरों में तलाश के बाद गिरफ्तारी
ACB ने अग्रवाल को पकड़ने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया:
- 40 टीमें गठित की गईं
- 21 शहरों में 100 से अधिक स्थानों पर तलाशी
- 50 से ज्यादा लोगों से पूछताछ (रिश्तेदार, दोस्त, घरेलू कर्मचारी, ड्राइवर आदि)
अधिकारियों के अनुसार, ACB दो बार अग्रवाल के करीब पहुंची, लेकिन वह हर बार बच निकलने में सफल रहे। आखिरकार गुरुवार को उन्हें एक सार्वजनिक स्थान से गिरफ्तार कर लिया गया।
पहले से गिरफ्तार अन्य आरोपी
इस मामले में पहले ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सरकारी इंजीनियर और अधिकारी शामिल हैं:
- दिनेश गोयल
- के. डी. गुप्ता
- शुभांशु दीक्षित
- सुशील शर्मा
- निरिल कुमार
- विशाल सक्सेना
- अरुण श्रीवास्तव
- डी. के. गौड़
- महेंद्र प्रकाश सोनी
- मुकेश पाठक (निजी व्यक्ति)
ये सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
निष्कर्ष
यह मामला राजस्थान में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। ACB की कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि बड़े स्तर के घोटालों में शामिल अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है।
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