“नरक में जलो” विवाद: पाकिस्तान-इज़राइल के बीच तीखी बयानबाज़ी, नेतन्याहू का कड़ा जवाब
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान और इज़राइल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने इज़राइल को “कैंसर जैसा राज्य” और “मानवता के लिए अभिशाप” बताया, जिस पर इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कड़ी प्रतिक्रिया..
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान और इज़राइल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने इज़राइल को “कैंसर जैसा राज्य” और “मानवता के लिए अभिशाप” बताया, जिस पर इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान
गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर (बाद में हटाए गए पोस्ट में) आसिफ ने कहा कि जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, तब लेबनान में “नरसंहार” हो रहा है।
उन्होंने लिखा कि..
- इज़राइल निर्दोष नागरिकों की हत्या कर रहा है
- पहले गाज़ा, फिर ईरान और अब लेबनान में हिंसा जारी है
आसिफ ने अपने पोस्ट में यहां तक कहा कि “फिलिस्तीनी भूमि पर बनाए गए इस ‘कैंसरस राज्य’ को बनाने वाले लोग नरक में जलें।”
नेतन्याहू का पलटवार
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए Benjamin Netanyahu ने इसे “अस्वीकार्य और चौंकाने वाला” बताया।
The Prime Minister's Office:
Pakistan Defence Minister’s call for Israel’s annihilation is outrageous. This is not a statement that can be tolerated from any government, especially not from one that claims to be a neutral arbiter for peace. — Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) April 9, 2026
उन्होंने कहा, “किसी भी सरकार द्वारा ऐसा बयान स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर उस देश से जो खुद को शांति का तटस्थ मध्यस्थ बताता है।”
इज़राइल के विदेश मंत्री की कड़ी प्रतिक्रिया
इज़राइल के विदेश मंत्री Gideon Sa'ar ने भी पाकिस्तान के बयान की निंदा की।
उन्होंने इसे “स्पष्ट यहूदी-विरोधी आरोप” बताया और कहा कि इज़राइल को “कैंसर” कहना उसके विनाश की मांग करने जैसा है।
सार ने यह भी कहा कि इज़राइल “उन आतंकियों के खिलाफ अपनी रक्षा करेगा जो उसके अस्तित्व को खत्म करना चाहते हैं।”
कूटनीतिक टकराव और बढ़ता तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब:
- पाकिस्तान ने पहले लेबनान पर इज़राइली हमलों की कड़ी आलोचना की थी
- उसके बाद Khawaja Asif का विवादित बयान आया
- विरोध के बाद आसिफ ने अपना पोस्ट हटा लिया
गौरतलब है कि इज़राइल और पाकिस्तान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, इसलिए यह सीधी सार्वजनिक प्रतिक्रिया एक असामान्य कदम माना जा रहा है।
इज़राइल के भारत में दूत Reuven Azar ने भी कहा कि इज़राइल पाकिस्तान को शांति वार्ता में “विश्वसनीय मध्यस्थ” नहीं मानता।
इज़राइल-लेबनान संघर्ष की पृष्ठभूमि
लेबनान इस संघर्ष में 2 मार्च को शामिल हुआ, जब ईरान समर्थित Hezbollah ने इज़राइली शहरों पर रॉकेट दागे।
इसके बाद:
- इज़राइल ने लेबनान पर भारी हमले किए
- सैकड़ों लोगों की मौत हुई
- यह संघर्ष अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बावजूद जारी रहा
Benjamin Netanyahu ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं है, जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के दावे के विपरीत है।
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता पर असर
स्थिति को और जटिल बनाते हुए, ईरानी मीडिया के अनुसार:
- यदि लेबनान पर हमले नहीं रुके, तो ईरान अमेरिका के साथ वार्ता रोक सकता है
- यह वार्ता इस्लामाबाद में प्रस्तावित थी
Israel views very gravely these blatant antisemitic blood libels from a government claiming to “mediate peace”.
Calling the Jewish state “cancerous” is effectively calling for its annihilation.
Israel will defend itself against terrorists who vow its destruction. https://t.co/CCMveNi9Qu — Gideon Sa'ar | גדעון סער (@gidonsaar) April 9, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम Donald Trump की समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले हुआ था।
निष्कर्ष
पाकिस्तान और इज़राइल के बीच यह तीखी बयानबाज़ी न केवल कूटनीतिक रिश्तों में और तनाव बढ़ा रही है, बल्कि मध्य पूर्व में चल रहे शांति प्रयासों पर भी गंभीर असर डाल सकती है।
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