उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बड़ा बयान: "सरकार आज लाचार है, वह एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकती"

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को न्यायपालिका में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, न्यायिक आदेशों की आड़ में जांच को रोके जाने और संविधान की मूल भावना से समझौता किए जाने पर तीखा सवाल उठाया..

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बड़ा बयान: "सरकार आज लाचार है, वह एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकती"
07-06-2025 - 06:05 AM

नयी दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को न्यायपालिका में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, न्यायिक आदेशों की आड़ में जांच को रोके जाने और संविधान की मूल भावना से समझौता किए जाने पर तीखा सवाल उठाया। चंडीगढ़ में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार आज एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकती, क्योंकि तीन दशक पुराना एक न्यायिक आदेश इसकी अनुमति नहीं देता।

 मुख्य बातें – उपराष्ट्रपति के वक्तव्य से

विषय

विवरण

एफआईआर दर्ज न होने की बाधा

उपराष्ट्रपति ने कहा, "सरकार आज लाचार है, एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकती, क्योंकि एक न्यायिक आदेश इसकी इजाजत नहीं देता जब तक उच्चतम न्यायपालिका का पदाधिकारी अनुमति न दे।"

संवैधानिक वैधता पर सवाल

"क्या जजों की समिति को कोई संवैधानिक या वैधानिक स्वीकृति प्राप्त है? क्या उसकी रिपोर्ट से कोई कानूनी परिणाम निकल सकता है?"

न्यायिक परिसर में नकदी बरामदगी

मार्च में दिल्ली स्थित एक सिटिंग जज के आवास से मिली भारी नकदी का ज़िक्र करते हुए कहा, "यह अवैध, बेहिसाब और स्पष्टतः संदिग्ध धनराशि थी, जिसकी अभी तक कोई जांच नहीं हुई।"

लोगों का न्यायपालिका से विश्वास डगमगाया

"अगर न्याय के मंदिर में ही भ्रष्टाचार हो जाए तो जनता कहां जाएगी? अगर यही हाल रहा तो लोकतंत्र की आत्मा को गहरी चोट पहुंचेगी।"

जजों की भी जांच होनी चाहिए

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपालों को छोड़कर किसी को भी स्थायी छूट प्राप्त नहीं है, तो फिर अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को क्यों न जांच के दायरे में लाया जाए?

बार एसोसिएशनों की सराहना

"मैं बहुत खुश हूं कि बार एसोसिएशन इस मुद्दे को उठा रही हैं। वकील लोकतंत्र के प्रहरी हैं। उन्हें सच्चाई और न्याय के लिए आगे आना होगा।"

 

धनखड़ के कुछ तीखे उद्धरण

  • जो अपराध हुआ है, उसने न्यायपालिका और लोकतंत्र की नींव को हिला दिया है।”
  • हमने तीन महीने गंवा दिए, और अब तक जांच शुरू नहीं हुई।”
  • जजों के घरों में हुए अपराध तक की जांच बिना अनुमति के नहीं हो सकती — यह स्थिति असहनीय है।”
  • अगर एफआईआर आज तक दर्ज नहीं हुई तो क्या यह न्याय का मज़ाक नहीं है?”
  • जो नकदी मिली, वह किसकी थी? कहां से आई? मकसद क्या था?”

 न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका में संतुलन की आवश्यकता

धनखड़ ने भारत के लोकतंत्र की मूल भावना – तीनों संस्थाओं के बीच पावर्स के पृथक्करण (Separation of Powers) – पर ज़ोर देते हुए कहा कि "न्यायपालिका का कार्य निर्णय देना है, उसे विधायिका या कार्यपालिका निर्देशित नहीं कर सकती।"

न्यायपालिका में अपराध — जांच क्यों नहीं?

उपराष्ट्रपति ने कहा कि यदि न्यायपालिका के अंदर भ्रष्टाचार हुआ है, तो एफआईआर, वैज्ञानिक जांच, और दोषियों की पहचान आवश्यक है — जिससे आम जनता का विश्वास फिर से बहाल किया जा सके।

निष्कर्ष

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने अपने भाषण में यह स्पष्ट किया कि न्यायिक पारदर्शिता, जांच की स्वतंत्रता, और संविधान के प्रति निष्ठा लोकतंत्र के मूल स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि:

"हमारी न्यायपालिका मेहनती और बुद्धिमान है, लेकिन अगर सिस्टम ही दूषित हो जाए तो न्याय की उम्मीद कहां बचेगी?"

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।