'सुबह तक खुश थी अमायरा लेकिन 11 बजे के बाद..': छात्रा की मौत पर CBSE का नोटिस, जयपुर स्कूल में बदसलूकी और लापरवाही का पर्दाफाश
नौ वर्षीय अमायरा कुमार की मौत की जांच में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की निरीक्षण समिति ने कई गंभीर खुलासे किए हैं। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 1 नवंबर को अमायरा ने जयपुर के नीरा मोदी स्कूल की चौथी मंज़िल से छलांग लगाई। यह कदम उसने उस “मानसिक उत्पीड़न और असहनीय तनाव” के माहौल में उठाया, जिसके लिए स्कूल की लापरवाही और बार-बार दिए गए संकेतों की उपेक्षा को ज़िम्मेदार माना..
जयपुर। नौ वर्षीय अमायरा कुमार की मौत की जांच में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की निरीक्षण समिति ने कई गंभीर खुलासे किए हैं। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 1 नवंबर को अमायरा ने जयपुर के नीरा मोदी स्कूल की चौथी मंज़िल से छलांग लगाई। यह कदम उसने उस “मानसिक उत्पीड़न और असहनीय तनाव” के माहौल में उठाया, जिसके लिए स्कूल की लापरवाही और बार-बार दिए गए संकेतों की उपेक्षा को ज़िम्मेदार माना गया है।
CBSE टीम ने 3 नवंबर को स्कूल और 11 नवंबर को अमायरा के घर जाकर जांच की। माता-पिता, स्कूल प्रशासन और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी रिपोर्ट में शामिल किए गए। जांच में सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र, बाल संरक्षण प्रोटोकॉल और CBSE के 2018 संबंधी उपनियमों के कई उल्लंघन पाए गए।
सुबह थी खुश, 11 बजे के बाद आया अचानक बदलाव
समिति की रिपोर्ट के अनुसार, अमायरा 1 नवंबर की सुबह पूरी तरह प्रसन्न दिखाई दी। CCTV फुटेज में वह नाचती, दोस्तों से बातें करती, हँसती और चॉकलेट व गोलगप्पे खाते नज़र आई। रिपोर्ट कहती है कि “दिन की शुरुआत में उसके परेशान होने का कोई संकेत नहीं मिला।” लेकिन, 11 बजे के बाद उसके व्यवहार में अचानक बदलाव देखा गया—वह “बेचैन, परेशान और मानसिक रूप से आहत” दिखी।
क्लासरूम में बदसलूकी का विवाद था केंद्र में
CCTV फुटेज में छात्रों के बीच तीखी बोलचाल दिखी। रिपोर्ट में माता-पिता और उपलब्ध क्लिप्स के आधार पर कहा गया है कि कुछ बच्चों द्वारा “गलत शब्दों और आपत्तिजनक टिप्पणियों” का इस्तेमाल किया गया।
- एक डिजिटल स्लेट पर कुछ लड़कों द्वारा लिखी/बनाई गई चीज़ अमायरा के लिए बेहद शर्मनाक और परेशान करने वाली बताई गई।
- रिपोर्ट के अनुसार, वह इस घटना से “हैरान और स्तब्ध” नजर आई।
लंबे समय से हो रहा था बुलिंग का सामना
समिति ने स्वीकार किया कि अमायरा महीनों से बुलिंग का शिकार थी।
- मई से अक्टूबर के बीच उसके साथ छह अलग-अलग बदसलूकी की घटनाएँ हुईं।
- माता-पिता ने कई बार शिकायत की, लेकिन
- स्कूल ने न तो शिकायत निवारण तंत्र बनाया
- और न ही एंटी-बुलिंग कमेटी—जो CBSE और NCPCR दोनों के दिशा-निर्देशों में अनिवार्य हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि स्कूल “भावनात्मक रूप से सुरक्षित वातावरण बनाने में असफल रहा” और उसने छात्रा में दिख रहे मानसिक तनाव के संकेतों को नज़रअंदाज़ किया।
कैम्पस में सुरक्षा और निगरानी में भारी चूक
CBSE समिति ने स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद नाकाफी पाया:
- छात्र बिना निगरानी के एक मंज़िल से दूसरी मंज़िल जाते रहे।
- CCTV कैमरों की लाइव फीड देखने के लिए कोई स्टाफ तैनात नहीं था।
- कई छात्रों ने ID कार्ड नहीं पहने, जिससे आपात स्थिति में पहचान में देरी हो सकती है।
- स्कूल में सुरक्षा एवं संरक्षा समिति मौजूद नहीं थी।
- ऊपरी मंज़िलों पर सुरक्षा जाल (सेफ्टी नेट) भी नहीं लगाए गए थे।
सबसे गंभीर बात—अमायरा चौथी मंज़िल तक बिना किसी की नज़र में आए पहुँच गई, जो निगरानी में भारी चूक दर्शाता है।
इसके अलावा, जहां से वह गिरी, उस स्थान को धो दिया गया था, जिससे फॉरेंसिक जांच में कठिनाई आई, रिपोर्ट ने इसे गंभीर चूक बताया।
स्कूल प्रबंधन पर कड़ा नोटिस
CBSE ने स्कूल की प्रिंसिपल और प्रबंधन को शो-कॉज़ नोटिस जारी किया है, जिसमें 30 दिनों में जवाब देने को कहा गया है।
नीरजा मोदी स्कूल की प्रिंसिपल इंदु दुबे ने कहा, “हमें शाम को पत्र मिला है, हम इसका अध्ययन कर रहे हैं। CBSE ने 30 दिनों में जवाब माँगा है।”
यदि जवाब संतोषजनक न पाया गया तो CBSE स्कूल की मान्यता रद्द करने सहित कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
CBSE की रिपोर्ट का कड़ा निष्कर्ष
रिपोर्ट का अंतिम निष्कर्ष, “स्कूल ने सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन किया। असहनीय आघात और मानसिक उत्पीड़न के बाद एक मासूम बच्ची ने अपनी जान गंवाई। प्रबंधन वैधानिक व्यवस्थाओं का पालन करने और समय पर उपाय करने में विफल रहा।”
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