पाकिस्तान को IMF से राहत: भारत की आतंकी फंडिंग पर चेतावनी के बावजूद $1 अरब का ऋण स्वीकृत
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कार्यकारी बोर्ड ने विस्तारित फंड सुविधा (EFF) के तहत पाकिस्तान को $1 अरब डॉलर की दूसरी किश्त जारी करने को मंजूरी दे दी ..
इस्लामाबाद/वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कार्यकारी बोर्ड ने विस्तारित फंड सुविधा (EFF) के तहत पाकिस्तान को $1 अरब डॉलर की दूसरी किश्त जारी करने को मंजूरी दे दी है। भारत ने इस निर्णय पर मतदान से परहेज़ किया और गंभीर चिंता जताई कि यह वित्तीय सहायता राज्य प्रायोजित आतंकवाद के लिए दुरुपयोग हो सकती है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, “प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने IMF द्वारा पाकिस्तान के लिए $1 अरब डॉलर की किस्त को मंज़ूरी देने और भारत की दबाव की रणनीति की असफलता पर संतोष जताया है।”
बयान में यह भी दावा किया गया कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और देश विकास की ओर अग्रसर है।
यह मंज़ूरी IMF द्वारा पाकिस्तान के EFF कार्यक्रम के तहत की गई समीक्षा के बाद दी गई है। गौरतलब है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अक्सर संकट में रही है और उसने पूर्ववर्ती IMF कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में भी खराब प्रदर्शन किया है।
भारत ने IMF की बैठक में कुछ गंभीर बिंदु उठाए, जिनमें शामिल थे:
- पाकिस्तान पिछले 5 वर्षों में 4 बार IMF कार्यक्रम ले चुका है, लेकिन फिर भी आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है।
- भारत ने सवाल उठाया कि यदि पूर्व के कार्यक्रम सफल होते, तो पाकिस्तान को बार-बार IMF से बेलआउट की ज़रूरत नहीं पड़ती।
- भारत ने IMF की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र की उपयुक्तता पर भी सवाल खड़े किए।
भारत ने यह भी ज़ोर दिया कि पाकिस्तान में सैन्य हस्तक्षेप अभी भी व्यापक है। भले ही देश में एक नागरिक सरकार है, लेकिन पाकिस्तान की सेना घरेलू नीतियों, यहां तक कि आर्थिक फैसलों पर भी निर्णायक प्रभाव डालती है।
भारत ने एक 2021 की संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सेना से जुड़े व्यापार “पाकिस्तान के सबसे बड़े कारोबारी समूह” हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था में सेना की गहरी जड़ें उजागर होती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि भारत ने चेताया कि पाकिस्तान को वित्तीय सहायता देना, सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश को इनाम देने जैसा है और इससे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की प्रतिष्ठा को जोखिम हो सकता है। भारत ने IMF से कहा।,
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