दक्षिण दिल्ली के तैमूर नगर में अवैध निर्माण पर चला बुलडोज़र, हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
दक्षिणी दिल्ली के तैमूर नगर में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नगर निगम ने एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। यह कार्रवाई स्थानीय नालों के किनारे बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए ..
नयी दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के तैमूर नगर में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नगर निगम ने एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। यह कार्रवाई स्थानीय नालों के किनारे बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए की गई, जो दिल्ली हाईकोर्ट के 28 अप्रैल को दिए गए निर्देश के तहत की गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इन अवैध अतिक्रमणों के कारण क्षेत्र में लगातार जलभराव की समस्या बनी हुई है। इसके अनुपालन में सुबह करीब 9 बजे से आधा दर्जन से अधिक बुलडोजर लगाए गए और लगभग आधे किलोमीटर क्षेत्र में फैले अवैध ढांचों को ध्वस्त किया गया।
कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
अदालत की सख्ती और अवैध कब्जेदारों की याचिका
DDA अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमणकारियों को कई बार नोटिस दिए गए थे, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक भूमि खाली नहीं की। इसके बाद कानूनी दखल की जरूरत पड़ी। दरअसल, 14 अतिक्रमणकारियों द्वारा दायर एक याचिका के माध्यम से मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था।
न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, “यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि दिल्ली के कई हिस्सों में जलभराव, विशेष रूप से 1 और 2 मई को हुई बारिश के दौरान, तैमूर नगर नाले के प्राकृतिक प्रवाह में अवरोध के कारण हुआ है।”
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कुछ व्यक्तियों द्वारा सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा कर लेना व्यापक जनहित पर प्राथमिकता नहीं पा सकता।
स्थानीय निवासियों का दर्द
DDA ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह अदालत के आदेशों के अनुरूप की गई है और कई बार चेतावनी दिए जाने के बाद ही कार्रवाई की गई। हालांकि, कई स्थानीय निवासियों ने अचानक मिली सूचना और पुनर्वास योजना के अभाव पर नाराजगी जताई। कई लोगों ने दावा किया कि वे पिछले 40 वर्षों से उस क्षेत्र में रह रहे थे और अब उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है।
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