'भारत को माफी माँगने की कोई ज़रूरत नहीं': लटनिक को थरूर का पलटवार; रूस को यूरोप के अरबों डॉलर के व्यापार का हवाला
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार को कहा कि भारत को “किसी भी तरह माफी माँगने की ज़रूरत नहीं है” क्योंकि उसने इस पूरे मसले पर “बेहद परिपक्वता” से व्यवहार किया है। उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन ने अनुचित तरीके से सिर्फ नयी दिल्ली को निशाना बनाया है, जबकि “यूरोप रूस की तिजोरी में हमसे कहीं अधिक अरबों डॉलर..
नयी दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार को कहा कि भारत को “किसी भी तरह माफी माँगने की ज़रूरत नहीं है” क्योंकि उसने इस पूरे मसले पर “बेहद परिपक्वता” से व्यवहार किया है। उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन ने अनुचित तरीके से सिर्फ नयी दिल्ली को निशाना बनाया है, जबकि “यूरोप रूस की तिजोरी में हमसे कहीं अधिक अरबों डॉलर डाल रहा है।”
थरूर ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हमें किसी बात के लिए माफी माँगनी चाहिए। भारत ने इस पूरे मामले में परिपक्वता दिखाई है। यहां तक कि पिछली अमेरिकी सरकारों ने भी हमें रूसी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि वैश्विक कीमतें स्थिर रह सकें।”
थरूर की यह टिप्पणी अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक के उस दावे के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था, “भारत अंततः बातचीत की मेज पर आएगा, माफी माँगेगा और फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कोई समझौता करेगा।”
लटनिक की बात का खंडन करते हुए थरूर ने कहा कि भारत से कहीं बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ रूस से गहरे तौर पर जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा, “चीन हमसे अधिक रूसी तेल और गैस खरीदता है। तुर्की भी हमसे अधिक रूसी तेल और गैस खरीदता है। यूरोप तेल और गैस नहीं लेता लेकिन रूस से अन्य वस्तुएँ खरीदता है। इस तरह वे रूस की तिजोरी में हमसे कहीं अधिक अरबों डॉलर डाल रहे हैं। यह अजीब है कि केवल हमें ही कथित रूप से रूस के युद्ध प्रयास को वित्तपोषित करने का दोषी ठहराया जा रहा है जबकि अन्य देश हमसे कहीं अधिक कर रहे हैं।”
थरूर ने अमेरिकी नीति को “गलती” बताते हुए कहा कि भारत की आलोचना “न तो उचित है और न ही जायज़।” उन्होंने कहा, “श्री लटनिक को समझना चाहिए कि हम भी एक संप्रभु राष्ट्र हैं, जैसे वे हैं। वे अपने संप्रभु फैसले ले सकते हैं, वैसे ही हम भी अपने फैसले लेंगे।”
दरअसल, लटकनिक ने शुक्रवार को ट्रंप की कठोर शुल्क नीति का हवाला देते हुए भारत को चेतावनी दी थी कि वह “रूसी तेल खरीदना बंद करे, ब्रिक्स का हिस्सा रहना छोड़े और अमेरिका व डॉलर का समर्थन करे, अन्यथा 50% टैरिफ झेलने को तैयार रहे।” उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि “एक-दो महीने में भारत को मेज पर आना ही होगा, माफी माँगनी होगी और फिर ट्रंप के साथ समझौता करना होगा। और यह ट्रंप पर निर्भर करेगा कि वह मोदी से कैसे व्यवहार करते हैं।”
लटनिक ने भारत को ब्रिक्स में “रूस और चीन के बीच की स्वर ध्वनि (vowel)” तक कह डाला। उन्होंने कहा, “अगर आप वही बनना चाहते हैं, तो बने रहिए... और देखते हैं यह कब तक चलता है।”
लटनिक की यह टिप्पणी उस समय आई जब स्वयं ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लहजा नरम करते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को “बहुत खास” बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी दोस्ती दोहराई। तियानजिन में हुए एससीओ सम्मेलन के बाद ट्रंप ने कहा, “मैं हमेशा दोस्त रहूँगा। मोदी एक महान प्रधानमंत्री हैं। मैं हमेशा उनका दोस्त रहूँगा, लेकिन इस वक्त वे जो कर रहे हैं, वह मुझे पसंद नहीं है। लेकिन भारत और अमेरिका का रिश्ता बहुत खास है। चिंता की कोई बात नहीं है, कभी-कभी ऐसे पल आते रहते हैं।”
ट्रंप के इस बयान पर प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह “राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और भारत-अमेरिका संबंधों के सकारात्मक आकलन की गहराई से सराहना करते हैं और उसका पूर्णतः प्रत्युत्तर देते हैं।”
हालाँकि, थरूर ने प्रधानमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया पर सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा,
“प्रधानमंत्री ने बहुत जल्दी जवाब दिया और विदेश मंत्री ने भी इस बुनियादी रिश्ते की अहमियत पर ज़ोर दिया कि यह अब भी एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। यह संदेश देना ज़रूरी है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि हम 50% शुल्क और उन अपमानजनक टिप्पणियों को इतनी आसानी से भूल सकते हैं, जो राष्ट्रपति और उनके सहयोगियों दोनों ने की हैं।”
कांग्रेस सांसद ने आगे चेतावनी दी कि ट्रंप का “अस्थिर स्वभाव” और दंडात्मक टैरिफ की “वास्तविक परिणतियाँ” भारत के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा, “हम इतनी जल्दी भूल और माफ़ नहीं कर सकते, क्योंकि ज़मीनी स्तर पर भारतीय वास्तव में इन परिणामों को झेल रहे हैं और हमें उनका समाधान करना होगा।”
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