झारखंड हाईकोर्ट ने ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर बार-बार सुनवाई टालने के लिए ₹8,000 का जुर्माना लगाया
झारखंड हाईकोर्ट ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (RGGVY) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर बार-बार सुनवाई टालने के चलते ₹8,000 का जुर्माना लगाया है..
रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (RGGVY) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर बार-बार सुनवाई टालने के चलते ₹8,000 का जुर्माना लगाया है। यह चौथी बार है जब कोर्ट ने कोड़ा पर सुनवाई में देरी के लिए आर्थिक दंड लगाया है।
मधु कोड़ा ने निचली अदालत में अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान उनके वकील ने फिर से समय की मांग की, जिससे कोर्ट ने नाराज़गी जताई और जुर्माना लगाया। कोर्ट ने अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद तय की है।
अब तक का जुर्माना
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तारीख |
जुर्माना राशि |
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13 दिसंबर 2024 |
₹1,000 |
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17 जनवरी 2025 |
₹2,000 |
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1 मार्च 2025 |
₹4,000 |
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13 जून 2025 |
₹8,000 |
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कुल जुर्माना |
₹15,000 |
कोर्ट ने आदेश दिया है कि यह पूरी राशि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) के पास जमा कराई जाए।
क्या है मामला?
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार करते हुए हैदराबाद की एक ब्लैकलिस्टेड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के निदेशक से ₹11.40 करोड़ की रिश्वत ली। बदले में कंपनी को झारखंड के 6 जिलों (लेटहार, गढ़वा, पलामू सहित) में विद्युतीकरण का ठेका दे दिया गया।
CBI की जांच
इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। एजेंसी ने मधु कोड़ा के खिलाफ पद का दुरुपयोग और आपराधिक कदाचार के आरोप लगाए हैं। शुक्रवार की सुनवाई में सीबीआई की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव ने पक्ष रखा।
यह योजना केंद्र सरकार की राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत शुरू की गई थी, जिसके अंतर्गत 2006 में झारखंड को ₹467.76 करोड़ आवंटित किए गए थे। इस परियोजना का उद्देश्य 27,359 गांवों में बिजली पहुंचाना और 29.26 लाख ग्रामीण परिवारों को लाभ देना था।
मधु कोड़ा को इस मामले में पहले गिरफ्तार किया जा चुका है और उन्होंने दो साल छह महीने न्यायिक हिरासत में बिताए, जिसके बाद 30 जुलाई 2013 को उन्हें जमानत मिली थी।
वर्तमान स्थिति:
वर्तमान में मामला आरोप निर्धारण को लेकर चल रहा है, जिसे मधु कोड़ा हाईकोर्ट में चुनौती दे रहे हैं। बार-बार की देरी के चलते अब तक कुल ₹15,000 का जुर्माना लगाया जा चुका है।
हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि इस तरह की टालमटोल आगे भी जारी रही तो और सख्त रुख अपनाया जाएगा।
ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाले की जांच कर रही CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के खिलाफ पद के दुरुपयोग और आपराधिक कदाचार (Criminal Misconduct) के आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को हुई सुनवाई में सीबीआई की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव ने एजेंसी का पक्ष रखा।
योजना का विवरण
यह परियोजना केंद्र सरकार की राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (RGGVY) का हिस्सा थी। वर्ष 2006 में झारखंड को ₹467.76 करोड़ की राशि आवंटित की गई थी, जिसका उद्देश्य राज्य के 27,359 गांवों में बिजली पहुंचाना था। इस योजना से 29.26 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद थी।
गिरफ्तारी और वर्तमान स्थिति:
- मधु कोड़ा को इस मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था।
- उन्होंने करीब दो साल छह महीने न्यायिक हिरासत में बिताए।
- उन्हें 30 जुलाई 2013 को जमानत दी गई थी।
- वर्तमान में मामला CBI की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय करने की प्रक्रिया से संबंधित है, जिसे मधु कोड़ा हाईकोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।
कोर्ट में सुनवाई जारी है, और बार-बार हो रही देरी के कारण अदालत पहले ही चार बार जुर्माना लगा चुकी है।
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