बड़े समझौते से पहले काजा कैलास भारत पहुंचीं
यूरोपीय संघ (EU) की उपाध्यक्ष काजा कैलास शनिवार को नई दिल्ली पहुंचीं। यह भारत की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच उच्चस्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला होने जा रही है, जिसके अंत में लंबे समय से बातचीत में अटके मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा हो..
यूरोपीय संघ (EU) की उपाध्यक्ष काजा कैलास शनिवार को नई दिल्ली पहुंचीं। यह भारत की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच उच्चस्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला होने जा रही है, जिसके अंत में लंबे समय से बातचीत में अटके मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा हो सकती है।
उनके आगमन का स्वागत करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह यात्रा भारत-यूरोपीय संघ द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ती गति को दर्शाती है।
जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “ईयू की उच्च प्रतिनिधि/उपाध्यक्ष के रूप में भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर @kajakallas का हार्दिक स्वागत है। यह यात्रा भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए एक उपयुक्त समय पर हो रही है, जो नियमित उच्चस्तरीय संवाद की गति पर आधारित है।”
वर्षों की बातचीत के बाद भारत-ईयू व्यापार वार्ता अंतिम चरण में
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर वर्षों से चली आ रही धीमी और कई बार कठिन वार्ताओं के बाद, मंगलवार को इसके निष्कर्ष की घोषणा होने की उम्मीद है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस समझौते के तहत यूरोपीय कारों और वाइन पर शुल्क में कटौती हो सकती है, जबकि भारतीय निर्यातकों को इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और रसायनों जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय बाजार तक अधिक पहुंच मिलेगी।
यह मुक्त व्यापार समझौता 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख केंद्र बिंदु माना जा रहा है, जो नई दिल्ली में आयोजित होगा। इस शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष एक नया व्यापक भारत-ईयू रणनीतिक एजेंडा भी अपनाने जा रहे हैं, जिससे व्यापार से आगे बढ़कर संबंधों को एक नई दिशा मिलने का संकेत है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले ही इस प्रस्तावित समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी “सभी सौदों की जननी” बता चुके हैं, जो इसके विशाल आकार और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। लगभग दो अरब लोगों के संयुक्त बाजार के साथ, यह समझौता ऐसे समय में दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ देगा, जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में विखंडन बढ़ रहा है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता अब तक का भारत का सबसे बड़ा और सबसे जटिल व्यापार समझौता होगा, जिसमें वस्तुओं, सेवाओं और व्यापार नियमों को लेकर यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के कस्टम्स यूनियन को शामिल किया जाएगा।
वैश्विक व्यापार में बदलाव के बीच यूरोप नए साझेदारों की तलाश में
यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे समृद्ध उपभोक्ता बाजारों में से एक है, जहां करीब 45 करोड़ लोग रहते हैं और जिसकी अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 18 से 22 ट्रिलियन यूरो आंका जाता है। हालांकि, 2023 में सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली (GSP) के लाभ खत्म होने के बाद से भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
इस समझौते को जल्द पूरा करने की कोशिशें वैश्विक व्यापार परिवेश में आए बदलावों से भी जुड़ी हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ ने पारंपरिक व्यापार मार्गों को बाधित किया है, जिसके चलते कुछ भारतीय निर्यातों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लग रहा है। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि इससे यूरोपीय संघ पर भारत जैसे साझेदारों के साथ आर्थिक संबंध गहरे करने का दबाव बढ़ा है, खासकर ऐसे समय में जब वॉशिंगटन यूरोपीय निर्यातों के प्रति अधिक सख्त रुख अपना रहा है।
अगले सप्ताह होने वाली संभावित घोषणा ऐसे रिश्ते में बदलाव का संकेत देगी, जो अक्सर राजनीतिक गर्मजोशी को ठोस आर्थिक परिणामों में बदलने में संघर्ष करता रहा है। हालांकि टैरिफ कटौती और बाजार पहुंच पर ज्यादा ध्यान जाएगा, लेकिन दोनों पक्षों के अधिकारी इसे एक बड़े रणनीतिक पुनर्संतुलन का हिस्सा मानते हैं।
रक्षा साझेदारी से भारत-ईयू रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा
व्यापार वार्ताओं के साथ-साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी भी समान रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी सप्ताह यूरोपीय संसद में बोलते हुए काजा कैलास ने पुष्टि की कि यूरोपीय संघ भारत के साथ एक नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर करने के लिए आगे बढ़ चुका है।
उन्होंने कहा, “यूरोप भारत के साथ एक शक्तिशाली नए एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। आज, यूरोपीय संघ ने भारत के साथ एक नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है। इससे समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और साइबर रक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग बढ़ेगा। मैं अगले सप्ताह नई दिल्ली में होने वाले भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान इस पर हस्ताक्षर करने की प्रतीक्षा कर रही हूं।”
यह समझौता रक्षा सहयोग के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएगा। जो संबंध पहले मुख्य रूप से खरीदार-विक्रेता तक सीमित थे, वे अब दीर्घकालिक प्रभावों वाली एक अधिक संरचित औद्योगिक साझेदारी में बदलने की उम्मीद है।
भारत के यूरोप के साथ पहले से ही मजबूत रक्षा व्यापार संबंध हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और इटली भारत को उन्नत हथियारों, प्लेटफॉर्म और उप-प्रणालियों के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहे हैं। वहीं, पिछले दो वर्षों में यूरोपीय देशों को भारत से रक्षा निर्यात—खासकर गोला-बारूद और विस्फोटकों का—तेजी से बढ़ा है, क्योंकि यूरोपीय देश भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य सहायता प्रतिबद्धताओं के चलते अपने भंडार को फिर से भर रहे हैं।
गणतंत्र दिवस पर ईयू नेताओं की मौजूदगी, प्रतीकात्मक संदेश
भारत-ईयू संबंधों का व्यापक राजनीतिक महत्व गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भी दिखाई देगा। 26 जनवरी को होने वाली परेड में यूरोपीय संघ का एक छोटा सैन्य दस्ता हिस्सा लेगा। यह पहली बार होगा जब किसी ईयू सैन्य टुकड़ी की गणतंत्र दिवस परेड में भागीदारी होगी। इकोनॉमिक टाइम्स ने 20 जनवरी को सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी थी।
गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 25 से 27 जनवरी तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे।
इस दौरान कोस्टा और वॉन डेर लेयेन 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री मोदी के साथ सीमित तथा प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे। शिखर सम्मेलन के इतर भारत-ईयू बिजनेस फोरम आयोजित होने की भी संभावना है।
भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं। पिछला शिखर सम्मेलन 15 जुलाई 2020 को वर्चुअल माध्यम से हुआ था। अधिकारियों का मानना है कि 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में ईयू नेताओं की मुख्य अतिथि के रूप में भागीदारी और शिखर सम्मेलन, साझा आर्थिक और रणनीतिक हितों के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इससे पहले, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा था कि यूरोपीय संघ भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब है—एक ऐसा सौदा जिसे कई लोग “मदर ऑफ ऑल डील्स” कह रहे हैं। दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान बोलते हुए उन्होंने यूरोप की व्यापक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग विस्तार रणनीति का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं। कुछ लोग इसे सभी सौदों की जननी कहते हैं—ऐसा समझौता जो लगभग दो अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करेगा।”
वॉन डेर लेयेन ने बताया कि वह अगले सप्ताह भारत की यात्रा करेंगी ताकि इस प्रस्तावित समझौते पर काम को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करना और सहयोग को गहरा करना यूरोपीय संघ की प्राथमिकता है, और यह समझौता यूरोप की उस व्यापक वैश्विक व्यापार रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह दुनिया भर के साझेदारों के लिए खुला रहना चाहता है।
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