कर्नाटक हाईकोर्ट ने महिलाओं के लिए एक दिन की सवैतनिक मासिक धर्म अवकाश योजना पर रोक लगाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें महिला कर्मचारियों को एक दिन का पेड मेंस्ट्रुअल लीव देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत ने यह रोक प्रक्रियात्मक खामियों के आधार पर लगाई। यह आदेश जस्टिस ज्योति मुळीमणि की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया, जो बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन (रजि.) की याचिका पर सुनवाई कर रही..
बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें महिला कर्मचारियों को एक दिन का पेड मेंस्ट्रुअल लीव देने की व्यवस्था की गई थी। अदालत ने यह रोक प्रक्रियात्मक खामियों के आधार पर लगाई। यह आदेश जस्टिस ज्योति मुळीमणि की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया, जो बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन (रजि.) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अब अगली सुनवाई तक यह सरकारी आदेश स्थगित रहेगा।
सरकार का 20 नवंबर का आदेश
कर्नाटक सरकार के श्रम विभाग ने 20 नवंबर 2025 को महिलाओं के लिए मासिक धर्म के दौरान एक दिन के सवैतनिक अवकाश की व्यवस्था लागू करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। लेकिन, होटल उद्योग ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि इससे अतिथि सत्कार उद्योग (हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री) को गंभीर परिचालन समस्याएं होंगी।
याची पक्ष का तर्क: आदेश के लिए कोई कानूनी आधार नहीं
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि राज्य सरकार ने एक ऐसा नियम लागू करने की कोशिश की है, जो किसी भी मौजूदा कानून में मौजूद नहीं है।
उन्होंने कहा, “सरकार ने यह एकतरफा आदेश जारी किया है, जिससे होटल उद्योग को भारी दिक्कतें होंगी। आदेश जारी करने से पहले सरकार ने किसी भी संगठन या हितधारक से राय नहीं ली।”
अदालत ने पूछा, क्या हितधारकों से सलाह ली गई?
हाईकोर्ट ने तर्क सुनने के बाद सीधे पूछा कि नोटिफिकेशन जारी करने से पहले क्या संबंधित संगठनों और हितधारकों से कोई राय ली गई थी? इस पर होटल एसोसिएशन के वकील ने साफ कहा— नहीं।
इस पर अदालत ने चिंता जताई और कहा कि हितधारकों से परामर्श न लेना गंभीर मुद्दा है। इसके बाद अदालत ने सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक जारी कर दी।
सरकार को नोटिस, अंतरिम आदेश में संशोधन की गुंजाइश खुली
अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार चाहे, तो वह अंतरिम रोक में संशोधन (modification) के लिए अर्जी लगा सकती है।
फिलहाल योजना अटकी—अगली सुनवाई में तय होगा कानूनी आधार
यह नोटिफिकेशन महिलाओं के लिए एक प्रगतिशील श्रम कल्याण कदम माना जा रहा था, लेकिन अब यह कानूनी और प्रक्रियागत बाधाओं में उलझ गया है।
अगली सुनवाई में हाईकोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह कदम कानूनी ढांचे के भीतर आता है या नहीं।
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