मदुरै पहाड़ी मंदिर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे दीप जलाने की मांग पर केंद्र और तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा
मदुरै की पहाड़ी पर स्थित मंदिर से जुड़े विवाद में और तेजी आते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार, तमिलनाडु सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जवाब तलब किया है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया..
मदुरै की पहाड़ी पर स्थित मंदिर से जुड़े विवाद में और तेजी आते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार, तमिलनाडु सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जवाब तलब किया है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें थिरुपरनकुंद्रम मंदिर के प्रबंधन को ASI के अधीन करने और पहाड़ी पर स्थित पवित्र ‘दीपथून’ पत्थर के स्तंभ पर 24 घंटे दीप प्रज्वलन की अनुमति देने की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने हिंदू धर्म परिषद द्वारा दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया।
याचिका में संगठन ने यह भी मांग की है कि कार्तिगै दीपम पर्व के अवसर पर हर साल पूरी पहाड़ी को दीपों से रोशन किया जाए और उस अवधि के दौरान श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति दी जाए। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि मौजूदा व्यवस्था मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाने वाला कार्तिगै दीपम कार्तिगै महीने (आमतौर पर नवंबर–दिसंबर) में मनाया जाता है। इस अवसर पर घरों और मंदिरों में दीप जलाए जाते हैं, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक होते हैं और भगवान शिव तथा भगवान मुरुगन की आराधना से जुड़े होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम मद्रास हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद आया है, जिसमें दो न्यायाधीशों की पीठ ने मंदिर में दीप जलाने की अनुमति देने वाले पहले के आदेश को बरकरार रखा था।
अब हिंदू धर्म परिषद इस मुद्दे पर व्यापक हस्तक्षेप की मांग करते हुए ASI की निगरानी सहित अन्य राहतें चाह रही है।
मद्रास हाईकोर्ट ने 6 जनवरी को एकल न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की अनुमति दी गई थी। साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके सरकार की तीखी आलोचना करते हुए सार्वजनिक शांति भंग होने की दलील को “हास्यास्पद” करार दिया था।
मदुरै की थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर अरुलमिगु सुब्रमणिय स्वामी मंदिर स्थित है, जो भगवान मुरुगन के छह पवित्र धामों (अरुपड़ई वीडु) में से एक है। इसी पहाड़ी पर 13वीं सदी की सूफी दरगाह—सिकंदर बादुशाह दरगाह—भी मौजूद है, जिससे यह स्थल कई धर्मों के लिए महत्व रखता है।
परंपरागत रूप से कार्तिगै दीपम के दौरान मंदिर परिसर में तय स्थानों पर दीप जलाए जाते रहे हैं। हालांकि, 2025 के अंत में एक याचिकाकर्ता ने पत्थर के स्तंभ के शीर्ष पर दीप जलाने की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया था।
राज्य सरकार, पुलिस, दरगाह प्रबंधन और तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने इस मांग का विरोध किया था। उनका तर्क था कि ऐसा करने की कोई ऐतिहासिक परंपरा नहीं है और विभिन्न धार्मिक स्थलों की नजदीकी के कारण इससे कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
What's Your Reaction?